आंध्र में संकट गहराया, 130 विधायकों का इस्तीफा (राउंडअप)
तेलंगाना पर फैसले के विरोध में आंध्र क्षेत्रीय आधार पर बंट गया है। इस फैसले के विरोध में 130 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हालांकि पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के प्रस्ताव का विरोध कर रहे रायलसीमा और तटीय आंध्र क्षेत्र के कांग्रेस सांसदों को आश्वस्त किया है कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं किया जाएगा। इन सांसदों ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी।
संसद भवन में प्रधानमंत्री कार्यालय में कांग्रेस नेता के.एस.राव के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रियों सहित 20 सांसदों ने इस बारे में प्रधानमंत्री से मुलाकात की।
आंध्र और रायलसीमा के नेता पृथक तेलंगाना का विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद राव ने कहा कि प्रधानंमत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में फैसला नहीं किया जाएगा।
राव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि तेलंगाना मुद्दे पर कांग्रेस कोर समिति में चर्चा की जाएगी।
केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा था कि पृथक तेलंगाना के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस मुद्दे पर इस्तीफा सौंपने वाले तीन सांसदों में से एक एल. राजागोपाल ने चेतावनी दी है कि अगर राज्य का बंटवारा किया गया तो वह आमरण अनशन शुरू कर देंगे। विजयवाड़ा से सांसद ने कहा कि वह अलग तेलंगाना राज्य कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के 130 विधायकों ने विधानसभाध्यक्ष किरण कुमार रेड्डी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा सौंपने वालों में सत्तारूढ़ कांग्रेस के 76, विपक्षी तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के 40 और प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी) के 14 विधायक शामिल हैं।
इस्तीफा सौंपने वाले विधायकों का आरोप है कि पृथक तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर केंद्र की सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने एकतरफा फैसला किया है।
294 सदस्यीय राज्य विधानसभा में आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के 175 विधायक हैं जबकि 119 सदस्य तेलंगाना क्षेत्र से आते हैं।
विधानसभाध्यक्ष रेड्डी ने कहा, "मैंने विधायकों का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। इस बारे में मैं कानूनी राय हासिल कर रहा हूं।"
विधायकों के इस्तीफे की वजह से शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इस मामले को नया मोड़ देते हुए मुख्यमंत्री के.रोसैया ने कहा कि उन्हें तेलंगाना के संबंध में विधानसभा में प्रस्ताव पेश करने के लिए केंद्र सरकार से न तो लिखित और न ही मौखिक निर्देश मिला है।
रोसैया ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने केवल यह कहा है कि पृथक तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसका अर्थ यह हुआ कि अन्य क्षेत्र के नेताओं से सलाह-मशविरा शुरू की जाएगी।
उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही जारी रहनी चाहिए ताकि मुद्दों पर बात हो सके और समाधान निकल सके। उन्होंने प्रत्येक क्षेत्र की जनता और राजनीतिक दलों से संयम बरतने की अपील की।
उधर पृथक तेलंगाना राज्य के प्रस्तावित गठन विरोध में आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों में शुक्रवार को बंद से जनजीवन प्रभावित हुआ।
इन क्षेत्रों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं और छात्रों के विरोध की वजह से आंध्र प्रदेश परिवहन निगम की बसें नहीं चलीं। आंध्र के नौ और रायलसीमा के चार जिलों में दुकानें, कारोबार और शैक्षणिक संस्थान भी बंद रहे।
तटीय शहर विशाखापट्टनम और गुंटूर, विजयवाड़ा, मछलीपटनम, नेल्लोर, कुरनूल और कडपा जैसे औद्योगिक स्थानों पर बंद का खासा असर रहा। इन इलाकों में बसें नहीं चलीं। विशाखापत्तनम में बंद के दौरान एचएसबीसी बैंक की एक शाखा को निशाना बनाया और तोड़फोड़ की गई।
प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह पर सभाएं कीं और पृथक तेलंगाना के प्रस्तावित गठन के विरोध में नारे लगाए। रायलसीमा में कई संगठनों ने राज्य के बंटवारें के विरोध में बंद का आह्वान किया।
पुलिस का कहना है कि हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। गरुवार के प्रदर्शन के दौरान दोनों क्षेत्रों में छात्रों ने कई बसों में तोड़फोड़ की थी।
उधर, पृथक राज्य के गठन की मांग को लेकर विगत 11 दिनों से भारी विरोध प्रदर्शन का गवाह बने तेलंगाना क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो गई है।
इस बीच 11 दिनों तक आमरण अनशन पर रहे तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख के. चंद्रशेखर राव को शुक्रवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
आंध्र उच्च न्यायालय में भिड़े वकील :
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के परिसर में शुक्रवार को उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई जब पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के मसले पर वकीलों के दो समूह भिड़ गए।
न्यायालय में विवाद उस समय खड़ा हुआ जब वकीलों के दोनों समूहों में बहसबाजी तेज हो गई। एक समूह तेलंगाना के गठन के प्रस्ताव का विरोध कर रहा था और इसी समूह की झड़प तेलंगाना समर्थक वकीलों से हुई।
आंध्र उच्च न्यायालय का परिसर 'जय तेलंगाना' और 'जय आंध्र' के नारों से गूज उठा। इसके बाद दोनों समूहों में मारपीट शुरू हो गई।
इस झड़प में कुछ वकीलों को चोटें आईं। पुलिस ने दखल देते हुए स्थिति पर काबू पाया। न्यायालय के मुख्य द्वार को बंद कर दिया गया ताकि कोई बाहरी दाखिल न हो सके।
गौरतलब है कि तेलंगाना राज्य के गठन के समर्थन में चले 11 दिनों के विरोध प्रदर्शन में इस क्षेत्र के वकीलों ने भी भाग लिया था।
भाजपा ने सरकार से खाका पेश करने को कहा :
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आंध्र प्रदेश से अलग तेलंगाना राज्य बनाने के प्रस्ताव पर सरकार से खाका पेश करने की मांग करते हुए इस मसले पर संसद को विश्वास में लेने के लिए कहा है।
राज्यसभा में शून्य काल में इस मसले को उठाते हुए भाजपा नेता एम वेंकैया नायडू ने कहा कि वह बार-बार कहते आ रहे हैं कि सदन को विश्वास में लिया जाना चाहिए। सरकार एक खाका पेश करे।
उन्होंने कहा, "मैं सदन के कामकाज में बाधा पैदा कर मामले को जटिल बनाना नहीं चाहता लेकिन सरकार को अपना होमवर्क करना चाहिए और लोगों को विश्वास में लेना चाहिए।"
नायडू ने कहा, "हमें हैदराबाद की स्थिति जैसे ज्वलंत मुद्दों पर स्पष्टीकरण चाहिए।"
उन्होंने कहा कि यदि लोगों को विश्वास में नहीं लिया गया तो अनावश्यक तनाव पैदा होगा।
हैदराबाद तेलंगाना की राजधानी होगा :
केंद्रीय गृह सचिव जी. के. पिल्लई ने शुक्रवार को कहा कि हैदराबाद प्रस्तावित नए तेलंगाना राज्य की राजधानी होगा।
पिल्लई ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया, "मुझे लगता है कि हैदराबाद हमेशा तेलंगाना की राजधानी रहेगा।"
पिल्लई ने कहा कि बातचीत ज्यादातर संघर्षो को सुलझाने का जरिया है। उन्होंने कहा, "हर कोई इस बात पर सहमत है कि हम समस्याओं को सिर्फ बातचीत के जरिए ही सुलझा सकते हैं और हरेक की स्थिति समझ सकते हैं। गृह मंत्री ने कहा है कि वह हर किसी से बातचीत करने को तैयार हैं और वार्ता जारी रहेगी।"
पिल्लई ने कहा कि वह महसूस करते हैं कि नए राज्य के गठन की प्रक्रिया की तस्वीर सामने आते ही आंध्र प्रदेश में जारी आंदोलन थम जाएगा।
भौगोलिक रूप से हैदराबाद तेलंगाना में है। कुछ सांसदों द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी के प्रमुख केंद्र के रूप में विख्यात हैदराबाद को संघ शासित प्रदेश बनाने का सुझाव देने से यह इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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