अलग तेलंगाना राज्य बनने से लोगों की आकांक्षाएं पूरी होग्ांी
मोहम्मद शफीक
हैदराबाद, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू करने के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(संप्रग) सरकार के फैसले से इस पिछड़े इलाके के लोगों की आकांक्षाएं पूरी होंगी।
नए राज्य के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही भाषायी आधार पर सबसे पहले गठित होने वाले आंध्र प्रदेश के विभाजन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। केंद्र के फैसले से तेलांगाना में जश्न का माहौल है। इस फैसले को लोग ऐतिहासिक मान रहे हैं।
पांच दशकों तक आंध्र प्रदेश सरकार की उपेक्षा झेलने वाले इस क्षेत्र के लोगों की खुशी उस वक्त चरम पर जा पहुंची जब सरकार ने इस मांग को पूरा करने के लिए विधेयक पेश करने के अपने निर्णय की घोषणा की।
तेलंगाना के भौगोलिक दायरे में हैदराबाद समेत 10 जिले आते हैं। कभी यह इलाका हैदराबाद रियासत का हिस्सा हुआ करता था, पर जब 1956 में भाषायी आधार पर आंध्र प्रदेश राज्य का गठन किया गया तो तेलंगाना को भी इसमें शामिल कर लिया गया, जबकि प्रथम राज्य पुनर्गठन आयोग(एसआरसी) को इस पर आपत्ति थी।
विभाजन के साथ ही आंध्र प्रदेश के पाले में सिर्फ 13 जिले रह जाएंगे। इनमें तटीय आंध्र प्रदेश के नौ संपन्न जिले एवं रायलसीमा क्षेत्र के चार पिछड़े जिले शामिल हैं। तेलंगाना की आबादी करीब 3.5 करोड़ है, जबकि शेष आंध्र प्रदेश की आबादी चार करोड़ है।
1948 में हैदराबाद रियासत के भारतीय संघ में विलय के बाद तेलंगाना का अस्तित्व अलग हैदराबाद राज्य के तौर पर बना रहा, पर एक नवंबर, 1956 को तेलंगाना क्षेत्र के लोगों की आपत्ति के बावजूद इसे आंध्र प्रदेश राज्य में शामिल कर लिया गया।
भाषायी समानता के बावजूद आंध्र एवं तेलंगाना के बीच सांस्कृतिक एवं आर्थिक-सामाजिक असमानताएं हैं। प्रथम एसआरसी आयोग ने 1955 में सुपुर्द अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया था। तेलंगाना के लोगों का शुरू से ही आरोप रहा है कि सरकारी नौकरियां एवं आर्थिक अवसर हासिल करने में वे आंध्र लोगों से पीछे रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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