टीआरएस प्रमुख की हालत गंभीर, तनाव जारी

हैदराबाद और क्षेत्र के अन्य हिस्सों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और नक्सल निरोधी ग्रेहाउंड्स सहित पुलिस बलों की भारी संख्या में तैनाती कर दी गई है। पांच से अधिक लोगों के एक साथ चलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, क्योंकि टीआरएस कार्यकर्ताओं, छात्रों, वकीलों और आंदोलन के समर्थकों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
अगल तेलंगाना आंदोलन का केंद्र उस्मानिया विश्वविद्यालय में पूरी तरह तनाव कायम रहा, क्योंकि विधानसभा मार्च की छात्रों की योजना को विफल करने के लिए छात्रों से छात्रावास खाली करने के लिए कह दिया गया है और मेस बंद कर दिए गए हैं।
पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस प्रवक्ता ए.आर.अनिरुद्ध ने कहा, "हमने छात्रों को 10 दिसंबर को मार्च आयोजित करने की अनुमति नहीं दी है।" इसके अलावा वारंगल में ककटिया विश्वविद्यालय में भी तनाव कायम है, क्योंकि वहां भी छात्रों को छात्रावास खाली करने के लिए कह दिया गया है।
गेंद केंद्र के पाले में
मामले के जल्द सुलझने के आसार फिलहाल नहीं दिखाई देते, क्योंकि राज्य सरकार ने गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी है।
दिल्ली में वीरप्पा मोइली और अहमद पटेल जैसे कांग्रेसी नेताओं ने तेलंगाना, आंध्रा और रायलसीमा क्षेत्रों के पार्टी सांसदों के साथ अलग-अलग कई बैठकें की।
आंध्रप्रदेश के पार्टी मामलों के प्रभारी मोइली ने संवाददाताओं को बताया कि कि तेलंगाना का मुद्दा संवेदनशील है और इस पर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। इसके पहले मुख्यमंत्री के. रोसैया ने कहा कि अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर केंद्र सरकार फैसला करेगी।
इस बीच टीआरएस प्रमुख ने परिजनों, चिकित्सकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के आग्रह के बावजूद अपना अनशन तोड़ने से इंकार कर दिया है। वहीं चिकित्सकों का कहना है कि यदि अनशन जारी रहा तो राव के जीवन को खतरा हो सकता है। वह निजाम चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एनआईएमएस) में भर्ती हैं।
एनआईएमएस के निदेशक प्रसाद राव ने कहा कि टीआरएस अध्यक्ष के रक्त की जांच की गई। जांच में पता चला है कि उनके स्वास्थ्य में काफी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि राव को अनशन तोड़ने के लिए कहा गया है।
एनआईएमएस ने कहा है कि यदि टीआरएस अध्यक्ष अनशन जारी रखते हैं तो इससे उनके जीवन को खतरा हो सकता है। चिकित्सकों का एक दल उनके स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए है। चिकित्सकों के इस दल ने राव के परिजनों से कहा है कि वे उन्हें अनशन तोड़ने के लिए राजी करें।
निदेशक राव ने कहा कि टीआरएस अध्यक्ष फिलहाल इलाज के बल पर चल रहे हैं। लेकिन एक सीमा के बाद दवा भी काम नहीं करेगी। उन्हें तत्काल भोजन लेना शुरू कर देना चाहिए। चिकित्सकों ने अभी तक कहा है कि राव की हालत स्थिर है, मगर वह कमजोर हो गए हैं।
अनशन तोड़ने से इंकार
लेकिन टीआरएस अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि वह अनशन तभी तोड़ेंगे, जब सरकार अलग तेलंगाना राज्य के गठन के लिए स्पष्ट रूप से आश्वासन दे। वह इस शर्त पर भी अनशन तोड़ने को तैयार हैं कि राज्य विधानसभा केंद्र सरकार से आग्रह करते हुए अलग तेलंगाना राज्य के गठन हेतु प्रस्ताव पारित कर दे।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री के.रोसैया ने मंगलवार को कहा कि अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर केंद्र सरकार फैसला करेगी। रोसैया ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को तेलंगाना मुद्दे से अवगत करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में आंध्र प्रदेश सरकार केंद्र सरकार के फैसले का पालन करेगी।
टीआरएस और अन्य विपक्षी दलों की मांग पर पूछे गए सवाल पर रोसैया ने कहा, "यदि केंद्र सरकार कोई फैसला करती है तो विधानसभा में कोई प्रस्ताव पारित करने की जरूरत नहीं होगी।" उन्होंने कहा कि पार्टी आलाकमान को उन्होंने एक रिपोर्ट भेजी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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