उत्सर्जन कटौती समझौते को स्वीकार नहीं करेगा भारत (राउंडअप)

इस बीच चीन ने गुरुवार को कहा कि वह ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के भारतीय उपायों का समर्थन करेगा और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत के साथ सहयोग बढ़ाने को तैयार है।

पर्यावरण राज्य मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि चीन सहित कुछ विकासशील देशों के साथ जलवायु परिवर्तन पर सामंजस्य बनाया गया है और भारत जीडीपी के अनुपात में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती कर रहा है।

चीन के वर्ष 2005 के स्तर से वर्ष 2020 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 40-45 प्रतिशत की कटौती करने और ब्राजील के 38-42 प्रतिशत की कटौती की घोषणा के कुछ दिनों बाद भारत ने यह घोषणा की है।

डेनमार्क की राजधानी में 7-18 दिसम्बर को होने वाले सम्मेलन में भारत के रुख पर लोकसभा में चली बहस का जवाब देते हुए रमेश ने कहा कि अन्य विकासशील देशों की तुलना में भारत का उत्सर्जन कम है और वर्ष 1990 से 2005 के बीच इसमें 17.6 प्रतिशत की गिरावट हुई।

उन्होंने कहा, "कुछ देशों द्वारा ऐसे कुछ प्रयास किए जा रहे हैं कि विकासशील देशों को ऐसे समय घोषणा करनी चाहिए, जब उनका उत्सर्जन चरम पर होगा। हम चरम के वर्ष पर समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। यह स्वीकार्य नहीं है। इन दोनों मुद्दों पर समझौता करने का कोई सवाल ही नहीं है। यह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में आम सहमति पर निर्भर है।"

जयराम रमेश ने गुरुवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक खतरा भारत को है। जलवायु परिवर्तन पर कोपेनहेगन में 7-18 दिसम्बर तक आयोजित होने जा रहे शिखर सम्मेलन पर लोकसभा में बहस के दौरान एक प्रश्न के जवाब में रमेश ने कहा कि चार कारणों से भारत को जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक खतरा है।

पहला, भारत की दो-तिहाई आबादी मानसून पर निर्भर है, जो जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हुआ है।

दूसरा, जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं, इससे उत्तर भारत की नदियों में जल प्रवाह को खतरा पैदा हो रहा है।

तीसरा, पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर, अंडमान और लक्षद्वीप जैसे पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील इलाके जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रहे हैं।

चौथा, जलवायु परिवर्तन झारखंड, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के वन इलाके में खनन के प्रभावों को और खराब करेगा।

रमेश ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बारे में भारत के पास शायद ही अपनी कोई जानकारी है। उन्होंने इसे दयनीय स्थिति बताया।

उन्होंने कहा कि अधिकांश जानकारी पश्चिमी देशों से हासिल होती है और इस संबंध में खुद की वैज्ञानिक शोध क्षमता को तैयार करने की तत्काल आवश्यकता है।

चीन करेगा भारत का समर्थन :

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्विन गैंग ने कहा, "हम भारत की वर्तमान स्थिति समझते हैं। राष्ट्रीय परिस्थितियों और क्षमता के अनुसार अनुकूलन और उत्सर्जन में कमी के भारत के उपायों का चीन समर्थन करता है।"

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चीन भारत के साथ संचार, समन्वय और सहयोग बढ़ाने को तैयार है। पिछले सप्ताह चीन ने वर्ष 2020 तक वर्ष 2005 के स्तर से कार्बन उत्सर्जन में 40-45 प्रतिशत कटौती की घोषणा की थी।

भाजपा ने कहा, दबाव में न झुके सरकार :

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन पर देश में बनी सहमति से सरकार को पीछे नहीं हटना चाहिए और कोपेनहेगन में दबाव में आकर किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए।

भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "सरकार को इस मुद्दे पर व्यापक आम सहमति के विपरीत नहीं जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को उत्सर्जन में कटौती के लिए कहने से पहले विकसित देशों को ऐसा स्वयं करना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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