विश्व बैंक अध्यक्ष ने की भारत की तारीफ

मुखर्जी ने भी वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान ऋण बढ़ाने के लिए विश्व बैंक की सराहना की। उन्होंने सितम्बर, 2009 में भारत के लिए एक ही दिन में 4.3 अरब डालर का ऋण पैकेज मंजूर करवाने में लिए जोएल्लिक की विशेष सराहना की। जोएल्लिक ने विश्व बैंक के पूंजी आधार बढ़ाने में भारत का सहयोग मांगा ताकि विश्व बैंक विकास वित्त की आवश्यकताओं की पूति कर सकें।
मुखर्जी ने विश्व बैंक के अध्यक्ष को बताया कि भारत सभी बहुपक्षीय विकास संस्थानों को वृहत पूंजी सहयोग देने में अग्रणी रहा है और उसने एशियाई विकास बैंक के पूंजी में 200 फीसदी की वृद्धि का जोरदार समर्थन किया था। मुखर्जी ने कहा कि वह विश्व बैंक में ध्वनिमत तथा कोटे संबंधी सुधार की प्रक्रिया शीघ्र पूरा होने को लेकर आशावान हैं ताकि उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के प्रभावी प्रतिनिधित्व में वृद्धि हो।
बैठक में जोएल्लिक के साथ, विश्व बैंक के दक्षिण एशिया की उपाध्यक्ष इसाबेल गुएरो, भारत में महानिदेशक रोबेटरे जाघा, आईएफसी के निदेशक पाओलो एम मार्टल्ली तथा अध्यक्ष की सहायक जुलिया निएल्सन थीं। भारतीय पक्ष की ओर से विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक पुलोक चटर्जी, वित्त मंत्री की सलाहकार आमिता पॉल, अपर सचिव (आर्थिक मामले) एल.एम. वस और संयुक्त सचिव डा. अनुप के पुजारी उपस्थित थे।
पिछले तीन महीनों में जोएल्लिक और मुखर्जी के बीच यह दूसरी भेंट थी। इससे पहले दोनों के बीच, अक्टूबर, 2009 में विश्व बैंकआईएमएफ की इस्तांबुल में हुई वार्षिक बैठक के दौरान भेंट हुई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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