जलवायु परिवर्तन से भारत को सर्वाधिक खतरा : जयराम रमेश
जलवायु परिवर्तन पर कोपेनहेगन में 7-18 दिसम्बर तक आयोजित होने जा रहे शिखर सम्मेलन पर लोकसभा में बहस के दौरान एक प्रश्न के जवाब में रमेश ने कहा कि चार कारणों से भारत को जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक खतरा है।
पहला, भारत की दो-तिहाई आबादी मानसून पर निर्भर है, जो जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हुआ है।
दूसरा, जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं, इससे उत्तर भारत की नदियों में जल प्रवाह को खतरा पैदा हो रहा है।
तीसरा, पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर, अंडमान और लक्षद्वीप जैसे पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील इलाके जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रहे हैं।
चौथा, जलवायु परिवर्तन झारखंड, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के वन इलाके में खनन के प्रभावों को और खराब करेगा।
रमेश ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बारे में भारत के पास शायद ही अपनी कोई जानकारी है। उन्होंने इसे दयनीय स्थिति बताया।
उन्होंने कहा कि अधिकांश जानकारी पश्चिमी देशों से हासिल होती है और इस संबंध में खुद की वैज्ञानिक शोध क्षमता को तैयार करने की तत्काल आवश्यकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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