'अमरीका के लिए भारत बेहद अहम'

उनका कहना था, ये महज़ संयोग नहीं है कि ओबामा प्रशासन के अब तक के कार्यकाल में पहला औपचारिक राजकीय दौरा भारत से है. इक्कीसवीं सदी में कुछ ही रिश्ते भारत और अमरीका की साझेदारी से ज़्यादा अहमियत रखते हैं.""
इसके पहले भारत के विदेश मंत्रालय ने अमरीका-चीन के साझा बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. अमरीका-चीन के साझा बयान में भारत और पाकिस्तान के संबंध सुधारने में दोनों देशों के सहयोग देने की बात कही गई थी.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा,'' भारत सरकार शिमला समझौते के अनुसार पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दे शांतिपूर्ण तरीके से द्विपक्षीय वार्ता के ज़रिए हल करने के प्रति वचनबद्ध है. तीसरे देश की भूमिका की कोई आवश्कता नहीं है.''
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस रविवार को वाशिंगटन पहुंच रहे हैं और मंगलवार को वो राष्ट्रपति ओबामा से मिलेंगे.
राष्ट्रपति बुश के शासन के दौरान भारत और अमरीका का रिश्ता ऐतिहासिक उंचाईयों तक पहुंचा था और कुछ लोगों का मानना है कि ओबामा प्रशासन के दौरान रिश्तों में थोड़ी ठंडक आई है. इस सोच को काफ़ी हद तक नकारते हुए विलियम बर्न्स ने भारत और अमरीका के रिश्तों की बात की है.
'पाकिस्तान कदम उठाए'
भारत स्थित अमरीकी राजदूत टिमोथी रोमर ने भी दिल्ली में वही बातें कीं जो भारत सुनना चाहता है. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अमरीका चाहता है कि पाकिस्तान मुंबई हमलों के लिए ज़िम्मेदार लोगो को सज़ा दिलाए.
उन्होंने कहा कि मुंबई हमले को एक साल पूरा होने को है और प्रधानमंत्री मनमेहन सिंह और राष्ट्रपति ओबामा की मुलाक़ात के दौरान निश्चित तौर पर इस बारे में चर्चा होगी. उनका कहना था कि जहां तक अमरीकी सरकार के सवाल है, उसका हमेशा से यही रुख़ रहा है कि पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से सख़्त कार्रवाई हो और उसका नतीजा दिखना चाहिए.
टिमोथी रोमर ने कहा कि अमरीका और भारत एक दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिला कर आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखेंगे. उनका कहना था कि राष्ट्रपति ओबामा और अमरीकी जनता भारत के साथ रिश्ते को दुनिया भर में सबसे ज़्यादा अहमियत देते हैं.
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा और शांति जैसे इक्कीसवीं सदी के कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा होगी.
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस बीच भारत में कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता ने कहा है कि अमरीका और चीन के साझा बयान को ज़रूरत से ज़्यादा तूल दिया जा रहा है. प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी का कहना था कि उनका मानना है कि अमरीका या चीन की भारत नीति में कोई बदलाव नहीं आया है.
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने अमरीका और चीन के साझा बयान की आलोचना की है और कहा है भारत को किसी तीसरे गुट की दखलअंदाज़ी ज़रूरत नहीं है. बीजेपी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि मामला बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे संस्दीय सत्र में भी उठाया जाएगा.












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