अंतरिक्ष पहुंचे एक लाख कीड़े

ये है एक लाख सूक्ष्म कीड़े. इनका इस्तेमाल वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए किया जाएगा जिसके नतीजो का फ़ायदा भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों को होगा. एक मिलीमीटर के इस कीड़े केनोरहैबडाइटिस एलीगान्स की लंबाई पर मत जाइए. अंतरिक्ष में साइज़ का फर्क नहीं पड़ता.
हमारे शरीर का 80 प्रतिशत डीएनए बिना रीड़ की हड़्डी वाले हमारे भाईयो, यानि कीड़े मकोड़े से मिलते जुलते है जो आपको आमतौर पर कूड़ा करकट खाते हुए आपके आसपास दिख जाते है. तो फिर वे भी अंतरिक्ष में शोध के काबिल तो हुए ही.
जापान और ब्रिटेन से आए इन ज़्यादातर कीड़ो पर अंतरिक्ष यात्रियों में मांसपेशियो को कमज़ोर करने वाली बीमारी मस्क्युलर एट्रोपी को रोकने के लिए परीक्षण किए जाएंगे. लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने वाले लोगों में मांसपेशियों की कमज़ोरी एक बड़ी समस्या है और आने वाले दिनों में जब लोग चांद और मंगल ग्रह पर लंबे समय तक रहने लगेंगे ये समस्या और विकट हो जाएगी.
इन कीड़ो को 11 दिनो तक अंतरिक्ष में रखा जाएगा और धरती पर लौटने पर शोध किया जाएगा कि इनके शरीर के प्रोटीन में किस तरह का असर इस शोध का हुआ है.












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