जनरल फ़ोन्सेका की असमय विदाई

रिटायर होने की इच्छा व्यक्त करते हुए जनरल फ़ोन्सेका ने कहा था कि उन पर से सरकार का भरोसा ख़त्म हो गया है. कोलंबो से बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैविलैंड का कहना है कि अब देश की जनता में यह उत्सुकता है कि क्या वे राष्ट्रपति के चुनाव में महिंदा राजपक्षे को चुनौती देंगे?
जनरल फ़ोन्सेका के दो सैनिक सहयोगियों ने बीबीसी को बताया है कि सोमवार की सुबह विदाई समारोह के बाद जनरल फ़ोन्सेका अपने दफ़्तर से चले गए. राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने तेज़ी से कार्रवाई करते हुए वायु सेना प्रमुख को उनकी जगह नियुक्त कर दिया है.
पत्राचार
रविवार को राष्ट्रपति के सचिव ने जनरल फ़ोन्सेका को लिखे एक कड़े पत्र में कहा था कि उन्हें अपना पद छोड़ना होगा और तत्काल प्रभाव से सेना से हटना होगा.सरकार और जनरल फ़ोन्सेका के बीच तनातनी उस समय बढ़ गई थी जब पिछले सप्ताह जनरल फ़ोन्सेका ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में शिकायत की थी कि एलटीटीई पर जीत के बाद उनके अधिकार छीन लिए गए हैं.
उन्होंने अपने पत्र में यह भी लिखा था कि लगता है राष्ट्रपति उन पर भरोसा नहीं करते.बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैविलैंड का कहना है कि एलटीटीई के ख़िलाफ़ लड़ाई जीतने वाले राजनीतिक नेतृत्व और सैनिक मशीनरी के बीच बड़ी खाई पैदा हुई है.साथ ही राजपक्षे समर्थकों के इस दावे पर भी असर हो सकता है कि एलटीटीई के ख़िलाफ़ लड़ाई का राजनीतिक फ़ायदा सिर्फ़ राजपक्षे को होगा.
संभावना
अब ये संभावना जताई जाने लगी है कि राष्ट्रपति चुनाव में जनरल फ़ोन्सेका राजपक्षे को चुनौती दे सकते हैं.रविवार को ऐसी उम्मीद थी कि महिंदा राजपक्षे पार्टी सम्मेलन में राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा करेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.इस सम्मेलन में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा, "कल के देशभक्त आने वाले समय में गद्दार हो सकते हैं."
उन्होंने कहा कि देश को बाँटने की कोशिश से मारे जा चुके एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरण काफ़ी ख़ुश होते.इस बीच एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने जनरल फ़ोन्सेका के इस आरोप को ख़ारिज कर दिया है कि एक महीने पहले भारतीय सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया था क्योंकि श्रीलंका सरकार को आशंका थी कि बग़ावत हो सकता है.












Click it and Unblock the Notifications