अफ़ग़ानिस्तान से हटेंगे यूएन कर्मचारी

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान से उन अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों को अस्थाई रूप से हटा रहा है जो ग़ैर-ज़रूरी श्रेणी में आते हैं.
इससे संयुक्त राष्ट्र से जुड़े लोगों के लिए सुरक्षा इंतज़ाम कड़े करने में मदद मिलेगी. बयान में कहा गया है कि बाद में हटाए गए कर्मचारी वापस अफ़ग़ानिस्तान आकर काम करेंगे.
अफ़ग़ानिस्तान में 1300 अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी काम कर रहे हैं. पिछले हफ़्ते काबुल में तालेबान के एक आत्मघाती हमले में संयुक्त राष्ट्र के पाँच कर्मचारी मारे गए थे. संयुक्त राष्ट्र के गेस्ट हाउस पर हुए हमले में भी पाँच अफ़गान नागरिकों की मौत हो गई थी.
वर्ष 2001 में तालेबान के सत्ता से बाहर होने के बाद ये संयुक्त राष्ट्र पर सबसे बड़ा हमला था.
संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में कहा है, "संयुक्त राष्ट्र अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की मदद के प्रति पूरी तरह वचनबद्ध है. हम हर मुमकिन कोशिश करेंगे कि जिस दौरान अतिरिक्त सुरक्षा इंतज़ाम किए जा रहे हैं, उस दौरान हमारी गतिविधियाँ ज़्यादा प्रभावित न हों."
संयु्क्त राष्ट्र इमारत पर हमला
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता ने काबुल में बताया है कि अफ़ग़ानिस्तान से कर्मचारियों को बाहर ले जाने के काम में तीन से चार हफ़्ते लगेंगे. उन्होंने कहा कि राहत सामग्री पहुँचाने जैसे कामों पर इसका असर नहीं पड़ेगा क्योंकि ये काम स्थानीय लोग करते हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये 600 कर्मचारी संयुक्त राष्ट्र के अफ़ग़ानिस्तान में कुल कर्मचारियों का 12 फ़ीसदी है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने पिछले हफ़्ते के हमलों की कड़ी शब्दों में निंद की थी और कहा था कि कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएँगे.
गेस्टहाउस पर हमला स्थानीय समयानुसार छह बजे हुआ था जब तीन तालेबान चरमपंथी ग्रेनेड और मशीन गन लेकर घुस आए थे. इमारत में आग लग गई थी. गोलीबारी में तीन बंदूकधारी मारे गए थे और करीब साढ़े आठ बजे स्थिति सामान्य हो पाई.












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