महाराष्ट्र में सरकार गठन का रास्ता साफ़

ज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
महाराष्ट्र के राजनीतिक मैदान में 15 दिनों से बनी अनिश्चितता का अंत जल्द होने वाला है. 15 दिनों से महाराष्ट्र में सरकार नहीं है लेकिन अब शायद शुक्रवार तक नई सरकार शपथ ग्रहण कर ले.
महाराष्ट्र में हाल ही संपन्न विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी का गठबंधन सबसे बड़े धड़े के तौर पर सामने आया. इसके बाद से दोनों के बीच सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर गतिरोध बना हुआ है.
नतीजा यह रहा है कि केवल मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के नामों पर सहमति बन सकी है. बुधवार से तेज़ हुए प्रयासों के बाद दोनों पार्टियों के बीच सरकार बनाने के लिए मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारों पर लगभग समझौता हो गया है.
हालांकि आधिकारिक तौर पर इसपर टिप्पणी करने को कोई नेता तैयार नहीं है लेकिन कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार अभी दो राउंड की बातचीत होनी बाकी है.
उधर दिल्ली में बुधवार रात पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री और एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि दोनों पार्टियों के बीच सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया है. दोनों दल सरकार के गठन पर लगभग सहमत हो चुके हैं और जल्द ही नई सरकार महाराष्ट्र की सत्ता संभाल लेगी.
पार्टी सूत्रों ने बताया है कि गुरुवार को दिन में दो चरण की बातचीत और हो रही है. शाम चार बजे तक दोनों चरण की बातचीत पूरी हो जाएगी और इसके बाद पाँच बजे शाम को कोई फैसला सार्वजनिक किया जा सकता है.
कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक अबतक के समझौते में कांग्रेस को 22 विभाग मिलने और एनसीपी को 20 विभाग मिलने तय हुए हैं.
राजनीतिक गतिरोध
राज्य में 13 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 82 सीटों के और राष्ट्रवादी कांग्रेस 62 सीटों के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता में वापस आई हैं.
नतीजों के ऐलान के बाद दोनों पार्टियों में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के पदों पर समझौता हो गया जिसके अनुसार मुख्यमंत्री कांग्रेस का होगा और उपमुख्यमंत्री एनसीपी का. लेकिन असल विवाद शुरू हो गया मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारों को लेकर.
समझौते के अनुसार मुख्यमंत्री के पद के अलावा मंत्रिमंडल में 44 विभाग होने हैं. कांग्रेस एनसीपी को 20 विभाग देना चाहती है लेकिन एनसीपी का कहना है कि दोनों पार्टियों को 50-50 प्रतिशत विभाग मिलने चाहिए. इसके इलावा दोनों में इस बात पर भी बहस छिड़ गई कि कौन-सा विभाग किस पार्टी को मिले.
ऐसा समझा जाता है कि कांग्रेस ग्रामीण विकास, गृहमंत्रालय, सार्वजनिक निर्माण और शहरी विकास अपने पास रखना चाहती है. पिछली सरकार में एनसीपी के पास गृह मंत्रालय और ग्रामीण विकास विभाग थे.
इन विभागों का बजट कई अन्य विभागों से अधिक है और इन विभागों को चलाने से कई तरह के लाभ हो सकते हैं. एनसीपी इस बात पर अड़ी थी की कांग्रेस 1999 के फार्मूले को अपनाए क्योंकि अब के नतीजे उस बार के चुनाव से मिलते जुलते थे और तब दोनों पार्टियों में आधे आधे विभाग बांट दिए गए थे.












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