'अल्पसंख्यकों की उपेक्षा बड़ा जोखिम'

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की वार्षिक आमसभा को संबोधित करते हुए चिदम्बरम ने कहा, "किसी भी राष्ट्र के द्वारा अल्पसंख्यकों की उपेक्षा करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। अल्पसंख्यकों की रक्षा करना बहुसंख्यकों का कर्तव्य है, चाहे वे धार्मिक, नस्लीय या फिर भाषाई अल्पसंख्यक ही क्यों न हो। यही लोकतंत्र का स्वर्णिम सिद्धांत है।"
सांप्रदायिक हिंसा भड़काना सभ्य समाज के खिलाफ
चिदम्बरम ने कहा, "हम इस्लाम को विदेशी नहीं मानते। हमारे मुसलमान भाई इस देश के सम्मानित नागरिक हैं। यह आपके पूर्वजों की भूमि है। यह आपकी जन्मभूमि है जहां आप रहते हैं और काम करते हैं।" उन्होंने कहा, "यह हमारे लिए गर्व की बात है कि इस्लाम सहित विश्व के सभी धर्मो के लोग यहां रहते हैं।"
साम्प्रदायिकता की निंदा करते हुए उन्होंने कहा, "साम्प्रदायिक हिंसा भड़काना साम्प्रदायिकता का सबसे बुरा रूप है। किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हिंसा फैलाना सभ्य समाज के खिलाफ है।"
चिदम्बरम ने कहा, "बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना धार्मिक कट्टरता और अति पूर्वाग्रह का नतीजा थी। ठीक इसी तरह धर्म के नाम पर हिंसा का सहारा लेने को भी धार्मिक कट्टरता और अति पूर्वाग्रह कहा जाना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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