नक्‍सलियों ने पुलिस अधिकारी को रिहा किया

Atindranath Dutta
पश्चिम बंगाल के नक्‍सलियों ने अगवा किए गए पुलिस अधिकारी अतींद्रनाथ दत्ता को रिहा कर दिया है। उनके रिहा किए जाने से उनके परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

मिदनापुर जिले में मंगलवार को नक्सलियों द्वारा अगवा किए गए पुलिस अधिकारी अतींद्रनाथ दत्ता की रिहाई की खबर आने के बाद कोलकाता के अहिरीटोला इलाके में स्थित दत्ता के घर पर दिवाली जैसा माहौल था। सबके चेहरे पर खुशी तैर रही थी। पूरे दिन आशा-निराशा के बीच झूलते हुए दत्ता के परिजन उस समय खुशी से झूम उठे जब राज्य के मुख्य सचिव अशोक मोहन चक्रबर्ती ने दत्ता के पिता को बेटे की रिहाई की खबर दी।

परिजन बेहाल हुए

बेटे की रिहाई की खबर सुनने के बाद पुलिस अधिकारी के पिता अशोक दत्ता ने पत्रकारों को बताया, "मुझे बताया गया है कि मेरा बेटा मुक्त कर दिया गया है और वह घर के रास्ते में है। मैं कुछ समय के बाद उससे बात कर सकता हूं।"

लेकिन सुबह का समय दत्ता के परिजनों के लिए बहुत पीड़ादायक रहा। क्योंकि ऐसी खबर आई कि पुलिस पश्चिम मिदनापुर जिले के लखनपुर में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में जुट गई है, जहां नक्सली नेता किशनजी ने दत्ता को रिहा करने का वादा किया था।

दत्ता के पिता ने कहा, "सुबह जिस तरह की स्थिति पैदा हुई थी हम सभी चिंता से बीमार हो गए थे। किशनजी ने धमकी दी थी कि यदि दस मिनट के भीतर पुलिस बल को हटाया नहीं गया तो वे दत्ता की हत्या कर देंगे। उसके बाद हमने किशनजी से बात की। उन्होंने कहा कि घटना के लिए सरकार जिम्मेदार है। उसके बाद हमने सरकार के एक प्रतिनिधि से बात की तब जाकर कार्रवाई रोकी गई।"

दत्ता के ससुर ने कहा, "अपराह्न् में जब हमने सुना कि 14 नक्सली महिलाओं को रिहा कर दिया गया है, तो हम सुनिश्चित हो गए कि परिस्थिति सही दिशा में आगे बढ़ रही है।"

यह पूछे जाने पर कि क्या अभी भी दत्ता पुलिस विभाग में रहना चाहेंगे, इस पर अशोक दत्ता ने कहा, "उसे केंद्र और राज्य सरकार में पांच-छह दूसरी नौकरियां मिली थीं। पुलिस से जुड़ने के बाद भी उसे भारतीय खाद्य निगम में नौकरी का प्रस्ताव आया था, लेकिन पुलिस विभाग ने उसे नहीं जाने दिया। वह खुद इस पेशे को पसंद करता है।" दत्ता की मां छंदा ने कहा, "मैं अब उसे पुलिस विभाग में नहीं रखना चाहूंगी। मैं उसे देखने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रही हूं।"

इसके पहले पश्चिम मिदनापुर जिला अदालत ने गुरुवार को दिन में 14 जनजातीय महिलाओं को रिहा कर दिया। नक्सलियों की दत्ता की रिहाई के बदले यह भी एक शर्त थी। पुलिस ने इन महिलाओं को लालगढ़ क्षेत्र से नक्सलियों के साथ संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक भूपिंदर सिंह ने पत्रकारों को बताया कि अंतींद्रनाथ दत्ता रिहाई के बाद अपने घर रवाना हो गए हैं।

मुख्‍यमंत्री को दिया धन्‍यवाद

अशोक दत्ता ने मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य और प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी (सीपीआई-माओवादी) के शीर्ष नेता श्वर राव से अपने बेटे की रिहाई की अपील की थी। अशोक दत्ता ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा," हमें प्रशासन से काफी मदद मिली है।"

मुख्य सचिव भी पुलिस अधिकारी की रिहाई से खुश नजर आए। उन्होंने कहा, "अब हम राहत महसूस कर रहे हैं। पिछले दो दिन हमारे लिए बेहद तनावपूर्ण गुजरे हैं। हमने दत्ता को रिहा कराने के लिए हर संभव प्रयास किए हैं।"

मंगलवार को मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए करीब 50 नक्सलियों ने बंदूक की नोक पर दत्ता के घर से उनका अपहरण कर लिया था। नक्सली दत्ता को संकरैल थाने पर ले गए जहां उन्होंने उपनिरीक्षक दिबाकर भट्टाचार्य और सहायक उपनिरीक्षक स्वपन राय की गोली मार कर हत्या कर दी और 19 बंदूकें लूट ली थीं। इसके बाद नक्सली दत्ता को साथ लेकर अपने ठिकाने की ओर चले गए थे।

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