गरीबों को रुलाएगी वैश्विक मंदी

विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की सालाना बैठक के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय किए गए शताब्दी विकास लक्ष्य (एमडीजी) को हासिल करने के प्रयासों को तगड़ा झटका लगा है।"
प्रणव मुखर्जी के अनुसार आने वाले सालों में विश्व बैंक सहायता की मांग ऊंची रहेगी। " बैंक को सहायता की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त पूंजी अपने पास रखनी होगी।"
भारत जैसे देशों का अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में मताधिकार बढ़ाने की मांग को दोहराते हुए मुखर्जी ने कहा, " वैश्विक अर्थव्यवस्था में आए बदलाव को परिलक्षित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव जरूरी हो गया है।"
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में विकासशील देशों की उत्प्रेरक की भूमिका को मान्यता मिलनी चाहिए। "अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव का प्रतिरोध होने से संस्थानों की वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications