मणिपुरः खौफ के साए में जी रहे लोग

आतंकी जहां अस्पतालों को गिरा रहे हैं, सरकारी अधिकारियों, हिंदी भाषियों की हत्याएं कर रहे हैं और मंदिरों से पैसे की उगाही कर रहें हैं वहीं पुलिस द्वारा क्षेत्र में कार्रवाई के नाम पर फर्जी मुठभेड़ों ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है।
नागरिक असुरक्षित
एक स्थानीय स्कूल अध्यापिका अरुणा देवी ने बताया, "मुझे नहीं लगता कि मणिपुर नागरिकों के लिए सुरक्षित स्थान है। एक ओर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं तो दूसरी ओर आतंकवादी उनके साथ जैसा चाह रहे हैं वैसा सलूक कर रहे हैं।"
हाल ही में हुई एक घटना में मंगलवार की मध्यरात्रि को मणिपुर के थोबल जिले के नांगपोक सेकमाई गांव में आठ ट्रकों में भरकर आए करीब 200 आतंकी उतरे। इन आतंकियों ने अपह्रत खुदाई यंत्र का उपयोग कर एक सरकारी अस्पताल को नष्ट कर दिया। बुधवार को अस्पताल में एक टीकाकरण कार्यक्रम होने वाला था हालांकि बाद में इसे स्थगित कर दिया गया।
मंदिरों से चंदा उगाही
शासन-व्यवस्था चला रही कांग्रेस पार्टी के एक स्थानीय विधायक एम. ओकेन सिंह का कहना है, "आतंकियों द्वारा अस्पताल को गिराए जाने की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए।" यद्यपि अस्पताल की इमारत गिराए जाने का कारण अस्पताल का सरकारी होना बताया जा रहा है। आतंकियों ने सरकार के प्रतीक के तौर पर इसे नष्ट किया।
राज्य में अलगाववादियों द्वारा चलाए जा रहे आतंक को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री इकरम इबोबी सिंह ने कहा, "विभिन्न मंदिरों को दिए जाने वाले चंदे और प्रसाद का कुछ प्रतिशत आतंकियों द्वारा जबरन वसूल किया जा रहा है।" 23 जुलाई को राजधानी इम्फाल के ह्रदयस्थल में सुरक्षा बलों द्वारा की गई एक फर्जी मुठभेड़ में 27 वर्षीय चोंगखम संजीत और एक गर्भवती महिला की मृत्यु होने के बाद से ही मणिपुर अशांत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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