गाड़ी चलाते हुए रखें कमर का ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नायर ने अपनी कमर में बचाव पट्टी (ब्रेस) का इस्तेमाल किया होता तो वह अपनी कमर को इतनी बुरी तरह जकड़ने से काफी हद तक बचा सकती थीं। गाड़ी चलाते वक्त शरीरे के पीछे टेक और नेक कॉलर का इस्तेमाल कमर और रीढ़ वाले हिस्सों को जख्मी होने से बचाने में काफी कारगर साबित होते हैं।
बेंगलुरू के वोकर्हा हॉस्पिटल्स में कंसल्टेंट न्यूरो सर्जन क़े एन. कृष्णा के मुताबिक लंबी यात्राएं गर्दन और कमर के लिए समस्याएं पैदा कर सकती हैं। वह कहते हैं, "हम ऐसी गाड़ियों में सफर करते हैं जो लग्जरियस दिखती हैं, लेकिन ऐसी गाड़ी कमर के लिए आरामदेह नहीं होती।"
ब्रेस और स्प्लिंट (खपची) बनाने वाली कंपनी एमजीआरएम मेडिकेयर द्वारा दिल्ली परिवहन निगम की बसों और अन्य बसों के चालकों के बीच किए गए शोध के पता चलता है कि अधिकांश चालक कमर दर्द के शिकार हैं। दरअसल, सर्वेक्षण के दौरान कंपनी को यह भी पता चला कि क्यों बसों के कई चालक बीच सड़क पर गाड़ी रोककर यात्रियों को चढ़ाने के आदी हैं। इसकी वजह यह है कि कमर दर्द से परेशान चालक गाड़ी केील को थोड़ा घुमान भी परहेज करना चाहता है, क्योंकि ऐसा करने से उसे दर्द होता है।
गाड़ी चलाते वक्त रीढ़ में व्यापक कंपन होता है और शरीर के इस हिस्से को झटका लगता है। अगर गाड़ी का अनुलंबन सही नहीं है तो यह समस्या और गहरा जाती है, खासकर गड्ढों से पटी देश की सड़कों पर यह समस्या जटिल हो जाती है।
लंबे समय तक वाहन चलाने के दौरान शरीर का सहज कटि झुकाव भी खत्म हो जाता है, और इस तरह मेरुदंड एवं चक्रिका (डिस्क) पर अतिरिक्त तनाव पैदा होता है।
जब चालक की सीट को पीछे की ओर धकेला जाता है तो पांव सीधे हो जाते हैं जिससे घुटने के पीछे की नस पर खिंचाव पैदा होता है।
वाहन चलाने से ग्रीवा अस्थि या गले के हिस्से पर भी भारी दबाव पैदा होता है, क्योंकि चालक को सीधे देखने के लिए गर्दन को ऊंचा रखना पड़ता है।
यहां तक कि यात्री को भी कमर में खिंचाव का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि कई कारों की सीटों की डिजाइन घटिया तरीके से तैयार की गई है। जब व्यक्ति गाड़ी में बैठा होता है तो रीढ़ एवं कूल्हों के पाश्र्व हिस्सों पर ज्यादा दबाव होता है। आसनास्थियां यानी सीटिंग बोन (इश्चियल ट्यूबरोसिटिज) शरीर के 75 फीसदी भार का वहन करती हैं;
छह ऐसे तरीके हैं जिन पर अमल कर आप वाहन चलाने दौरान अपने कमर को आराम दे सकते हैं।
1. उपयुक्त सीट संरेखण : यह सुनिश्चित करें कि आपकी सीट क्लच और एक्सीलेटर से उपयुक्त दूरी पर है जो वाहन चलाने को आरामदेह बनातें हैं।
2. लंबी यात्राओं के दौरान बीच-बीच में रूकें : जब आप लंबी यात्रा कर रहे हों, तो पांवों को फैलाने एवं अपनी मांसपेशियों के व्यायाम के लिए बीच-बीच में रूकें।
3.ील के करीब रहें : यह सुनिश्चित करें कि आपील के इतने करीब हों कि आपकी दोनों कोहनी थोड़ी मुड़ी हो।
4. अनुलंबन की जांच करते रहें : क्या आपकी गाड़ी आदर्श स्थिति में है? कार की त्रुटियों को पूरी तरह दूर कर इसे बिल्कुल बेहतर स्थिति में रखें ताकि इसे अनावश्यक झटकों व असहजता से बचाया जा सके।
5. छोटी गद्दी या कमर के लिए टेक का इस्तेमाल करें। यहां तक कि आप एक छोटी तौलिये को भी मोड़कर उसे कमर के निचले हिस्से एवं सीट के बीच रखकर लाजवाब नतीजा हासिल कर सकते हैं। लेकिन, यह सुनिश्चित करें कि इसका कुछ वैज्ञानिक आधार हो।
6. गाड़ी चलाते वक्त कमर में बचाव पट्टी बांधे : ऐसा करने से वाहन चलाते वक्त आपकी मुद्रा सटीक रहेगी और कटि-त्रिकोण (ल्यूंबो-सैक्रल) को अतिरिक्ति सहारा देने से आप वाहन चालाने के दौरान सुकून महसूस करेंगे। फोम से वैज्ञानिक तरीके से तैयार मुलायम नेक कॉलर का इस्तेमाल लंबी यात्राओं के लिए काफी उपयोगी है। यह गर्दन वाले हिस्से को क्षति से बचा सकता है। लेकिन एक बार फिर यह सलाह दी जाती है कि इसकी डिजाइन उपयुक्त होनी चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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