भागना चाहता था प्रभाकरण

गोकुलन ने पूछताछ में बताया कि लडाई के अंतिम दौर में 18 मई को वानी में मारे जाने के एक दिन पूर्व प्रभाकरण ने सेना की घेराबंदी तोड़कर पुतुकुदियिरुप्पु के जंगलों से भागने की कोशिश की थी।
प्रभाकरण ने मास्टर से कहा था, 'अगर हम अपनी योजना में नाकाम रहते हैं तो हम सेना के हाथों मारे जाएंगे। ऐसी हालत में कोई भी ईलम का दावा नहीं कर सकेगा और हमारा सपना टूट जाएगा।" अखबार 'बॉटमलाइन" की खबर में मास्टर के हवाले से कहा गया है कि अगले दिन प्रभाकरण मारा गया और ईलम का सपना बिखर गया।
मास्टर ने बताया कि संघर्ष के नाजुक दौर में लिट्टे ने 12 साल के बच्चे से लेकर 50 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गो को भर्ती करना शुरू कर दिया था। इन्हें बहुत कम अवधि का प्रशिक्षण देना ही संभव था।












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