मौत का पर्याय नहीं है कैंसर
नई दिल्ली, 3 फरवरी (आईएएनएस)। डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर मौत का पर्याय नहीं है, बशर्ते कि समय रहते उसका इलाज शुरू हो जाए। भारत में प्रति वर्ष 10 लाख कैंसर के नए मामले सामने आते हैं। लेकिन इन आंकड़ों के बावजूद डॉक्टर कैंसर रोगियों के इलाज को लेकर आशावान हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रति वर्ष 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक प्रमुख कैंसर रोग विशेषज्ञ अशोक वैद्य ने आईएएनएस को बताया, "चूंकि इलाज के लिए नई दवाइयां व तकनीक आ रहे हैं, लिहाजा शुरुआती अवस्था वाले कैंसर को मौत का पर्याय नहीं माना जा सकता।"
उन्होंने कहा, "नई दवाएं व रेडियोथेरैपी व केमोथेरैपी के आने के बाद इलाज की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं।"
भारत में कैंसर के वर्ष 2004 के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो पुरुषों में कैंसर के नए मामलों में दिल्ली का स्थान सबसे ऊपर है। यानी दिल्ली में प्रति वर्ष 100,000 पुरुषों में से 126 लोग कैंसर से पीड़ित होते हैं। जबकि बेंगलुरू का आंकड़ा इस मामले में सबसे निम्न स्तर पर है, यानी प्रति 100,000 में मात्र 92 पुरुष कैंसर पीड़ित होते हैं। इसके अलावा दिल्ली में प्रति वर्ष प्रति 100,000 महिलाओं में से 142 महिलाएं कैंसर की शिकार होती हैं। जबकि भोपाल में महिलाओं के कैंसर पीड़ित होने का प्रतिशत सबसे कम है। यानी प्रति 100,000 पर 107 महिलाएं।
भोपाल, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद व कोलकाता में आमतौर पर पुरुष फेफड़े के कैंसर का शिकार बनते हैं। जबकि बेंगलुरू व चेन्नई में पेट के कैंसर के मामले देखे जाते हैं।
वैद्य कहते हैं, "हमारे देश में कैंसर के 40 प्रतिशत मामले तंबाकू से जुड़े होते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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