एआईआर और दूरदर्शन कर्मियों को केंद्रीय कर्मियों दर्जा मिला
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बाइपास सर्जरी के कारण विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में गुरुवार को संपन्न हुई कैबिनेट की बैठक में एआईआर और दूरदर्शन के कर्मचारियों की स्थिति पर जारी अनिश्चितता को समाप्त करते हुए इस संबंध में फैसला किया गया।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि एआईआर और दूरदर्शन के कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर प्रसार भारती में काम करते रहेंगे। एक स्वायत्त संगठन में काम करने के कारण इन कर्मचारियों की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी।
कर्मचारियों ने खुद को प्रसार भारती में स्थानांतरित करने के सरकार के कदम का विरोध किया था और केवल एआईआर तथा दूरदर्शन में काम करने की इच्छा जाहिर की थी।
बयान में कहा गया है कि एक स्वायत्त संगठन के कर्मचारी होने के कारण इन लोगों को केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) और अपने बच्चों को केंद्रीय विद्यालयों में दाखिला दिलाने तथा अन्य सुविधाओं के मामले में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
मंत्रिमंडल के निर्णय से इस अनिश्चितता का अंत हो गया है। बयान में कहा गया है कि कर्मचारियों को एक जून 2004 में प्रभावी हुई पेंशन योजना का लाभ मिलेगा। एआईआर और दूरदर्शन के कर्मचारियों को केंद्र सरकार के वेतनमानों का लाभ भी मिलेगा लेकिन उनको प्रतिनियुक्ति भत्ता नहीं मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि प्रसार भारती निगम की स्थापना नवंबर 1997 में एक संवैधानिक संस्था के रूप में की गई थी और आल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन को इसके दायरे में लाया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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