नेपाल में प्रचंड सरकार की आरक्षण की पहल का विरोध
काठमांडू, 29 जनवरी (आईएएनएस)। नेपाल की माओवादी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में 45 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने का फैसला किया है। दूसरी ओर इसको लेकर राजनीतिक विरोध भी शुरू हो गया है।
प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल प्रचंड और उनके मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक लोक सेवा अध्याधेश पेश किया जिसमें महिलाओं, मधेशियों, दलितों और पिछड़े क्षेत्रों के लोगों के लिए सरकारी कंपनियों में आरक्षण की बात कही गई है।
नेपाल के सूचना एवं संचार मंत्री कृष्ण बहादुर महारा ने बताया, "यह फैसला इसलिए किया है ताकि इस बात को सुनिश्चित किया जा सके कि सार्वजनिक क्षेत्र व्यापक और निष्पक्ष है।"
दूसरी ओर इस अध्यादेश को मूर्तरूप देने से पहले ही इसके खिलाफ विरोध के स्वर उठने लगे हैं। मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने इसका विरोध करने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि इस अध्यादेश को पास कराने के लिए नेपाली कांग्रेस का समर्थन जरूरी है।
पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता गिरिजा प्रसाद कोइराला ने कहा कि उनका दल इस अध्यादेश का विरोध करेगा।
नेपाल में दलित हितों की बात करने वाली पार्टी दलित जनहित पार्टी (डीजेपी) के महासचिव ठाकुर चंद्रघाट राज ने कहा, "हमारी मांग है कि दलितों को सभी सरकारी संस्थाओं में 25 प्रतिशत का आरक्षण दिया जाए।"
उधर, मधेशी राजनीतिक दलों ने भी इस अध्यादेश का विरोध करने का फैसला किया है। तराई मधेश लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हृदयेश त्रिपाठी ने कहा, "चुनाव अधिनियम के तहत मधेशियों को 32 प्रतिशत का आरक्षण मिलना चाहिए। अगर इससे कम कुछ भी होता है तो हम उसका विरोध करेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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