बिहार में हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में आए राजनीतिक दल
हड़ताल के कारण राजधानी से लेकर प्रखंड मुख्यालय तक में सरकारी कार्य लगभग ठप हो गए हैं। परंतु सरकार और कर्मचारी दोनों अपनी-अपनी बातों पर अडिग हैं। इस कारण हड़ताल खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं।
बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) के महासचिव रामबली प्रसाद ने आईएएनएस को बताया कि अब कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन राजनीतिक दलों द्वारा भी किया जाने लगा है। उन्होंने बताया कि वामपंथी दलों के अलावे लोक जनशक्ति पार्टी भी कर्मचारी संघ के नेताओं से साथ देने का वादा किया है।
उन्होंने कहा कि मरीजों के इलाज में बाधा पहुंचाने वाले हड़ताली कर्मचारियों पर मुकदमा चलाने की सरकारी घोषणा मात्र एक बहाना है। दरअसल सरकार का इरादा इस सफल हड़ताल को कुचलना है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में आपातकालीन सेवा को हड़ताली कर्मचारियों द्वारा बाधित करने का सवाल ही नहीं उठता।
इधर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्य सचिव बद्री नारायण लाल ने गुरुवार को बताया कि कर्मचरियों की हड़ताल जायज है। उन्होंने कहा कि हड़ताली कर्मचारियों के पक्ष में भाकपा के अलावे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) भी सड़क पर उतरेगी। इधर, लोक जनशक्ति पार्टी के राज्य महासचिव रसुल बलियारी ने गुरुवार को हड़ताली कर्मचारियों के प्रदर्शन में भाग भी लिया।
उल्लेखनीय है कि राज्य के अराजपत्रित कर्मचारी महासंघों और राज्य सचिवालय संघ तथा शिक्षकों के सात संगठनों वाला बिहार राज्य प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षाकर्मी संयुक्त मोर्चा के लगभग तीन लाख कर्मचारी 7 जनवरी से हड़ताल पर हैं। छठे वेतनमान को केन्द्र सरकार की तर्ज पर लागू करने की मुख्य मांग को लेकर वे हड़ताल पर हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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