सेना के पास शीघ्र होगा जल-थल में काम कर सकने वाला बल
रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "थल सेना की उभयचर ब्रिगेड का तिरुवनंतपुरम में पिछले एक साल से प्रशिक्षण चल रहा है और अगले माह तक रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी इसे औपचारिक तौर पर लांच करेंगे।"
'91 इंफैट्री ब्रिगेड' नामक इस उभयचर बल की क्षमता 3000 जवानों की है। अधिकारी ने कहा, "जवानों को सिख, गोरखा और मद्रास रेजीमेंट से लिया गया है।"
इस उभयचर बल का प्रयोग नौसेना की मारक क्षमता, ढुलाई और जवानों को समुद्री किनारे तक भेजने में किया जाएगा। आधुनिक समय में फास्ट पेट्रोल बोट और छोटे जहाजों के अलावा कामांडो के रूप में उभयचार बल जरूर की है।
एक अधिकारी ने कहा, "आधुनिक युद्धक्षेत्र में समुद्र तट पर इंफैंट्री के जवानों को उतारना सभी तरह के सैन्य कौशल में सबसे कठिन है।"
अधिकारी ने कहा, "इसमें शामिल सभी जवानों के लिए हवाई शक्ति, समुद्री जंग, समुद्री परिवहन, ढुलाई की योजना, विशेषज्ञ हथियार, जमीनी लड़ाई, नीतियों और बारीक कौशल के गहन प्रशिक्षण की जरूरत होती है।"
दरअसल, एक योजनाबद्ध और उभयचर ऑपरेशन समुद्र में जहाजों पर जवानों और उनके हथियारों की तैनाती के साथ शुरू की जाने वाली त्रिस्तरीय कार्रवाई है जो दुश्मन की तट पर लैंडिंग को प्रभावित करती है। यह ऑपरेशन पूरे युद्ध के परिदृश्य को बदल सकता है।
भारतीय सेना लंबे समय से अपने आप को उभयचर शक्ति से लैस करती आ रही है। भारतीय नौसेना के पास एक सबसे आधुनिक उभयचर युद्धपोत आईएनएस शार्दूल है, जिसपर पिछले साल भारतीय थल सेना के 5 आर्मर्ड रेजिमेंट को तैनात किया गया।
उपकरणों से लैस आईएनएस शार्दूल एक उभयचर युद्धपोत है जो जवानों को ढोने और समुद्र तट पर ऑपरेशन को कामयाब बनाने के लक्ष्य को पूरा करता है।
5 आर्मर्ड रेजीमेंट के पास विश्व के कुछ सक्षम और आधुनिक टैंक है। वर्ष 2002 से रेजीमेंट यांत्रिक ऑपरेशन की नवीनता पर जोर देते आ रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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