श्रीलंका में युद्ध से मानवीय संकट : राहत एजेंसियां
नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। श्रीलंका में तमिल विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) और श्रीलंकाई सेना के बीच जारी संघर्ष में सैकड़ों तमिल नागरिकों की मौत हो चुकी है, वहीं बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। अंतर्राष्ट्रीय राहत एजेंसियों की माने तो श्रीलंका में मानवीय संकट की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है।
दूसरी ओर श्रीलंका सरकार इस बात पर जोर दे रही है किलिट्टे के साथ जारी संघर्ष में आम लोगों की मौत ना के बराबर हुई है। बावजूद इसके राहत एजेंसियां सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं कर रही है। हालांकि, राहत एजेंसियां इस बात पर एकमत नहीं हैं कि इन मौतों के लिए कौन जिम्मेदार हैं-श्रीलंका या लिट्टे।
लिट्टे के विरूद्ध सैन्य कार्रवाई में मुल्लइतिवू जिले में सबसे ज्यादा लोगों के मारे जाने और घायल होने की रिपोर्ट है। इस करीब 300 वर्ग किलोमीटर वाले क्षेत्र में आम नागरिकों की आबादी डेढ़ से ढ़ाई लाख के बीच हैं।
श्रीलंका सरकार लिट्टे पर आरोप लगा रही है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए आम नागरिकों को कवच के रूप में इस्तेमाल कर रही है। दूसरी ओर तमिलों, जिसमें लिट्टे के विरोधी भी शामिल हैं, का कहना है कि सेना सोच समझकर तमिलों को लक्ष्य बना रही है।
अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (आईसीआरसी) ने बुधवार को बताया कि लिट्टे और सेना के बीच जारी संघर्ष में सैंकड़ो लोग मारे गए और भारी संख्या में लोग घायल हुए हैं जिनके लिए स्वास्थ्य सुविधाएं कम पड़ रही है।
एक गैर तमिल सूत्र के अनुसार लिट्टे और सेना के बीच 25, 26 और 27 जनवरी को हुए संघर्ष में कम से कम 160 तमिल मारे गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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