वापस असली रास्ते पर आई कोसी

कोसी ने भारतीय सीमा के पास नेपाल में मानव निर्मित तटबंध को अगस्त में तोड़ दिया था और भयंकर तबाही मचाई थी.
कोसी नदी में आई उस बाढ़ में पूर्वी बिहार के क़रीब 400 लोग मारे गए थे और लाखों प्रभावित हुए थे.
नेपाल के हज़ारों लोग कोसी की बाढ़ की वजह से बेघर हो गए थे.
कोसी को उसके पुराने रास्ते पर पहुँचाने में 500 से भी ज़्यादा लोगों के दल को लगाना पड़ा.
इसके लिए उन्हें बाँध को रेत की बोरियों, कंक्रीट और तारों से बाँधना पड़ा और इसके बाद ही मानव निर्मित उस तटबंध को ठीक किया जा सका जिसे नदी ने तोड़ दिया था.
असली रास्ता
आखिरकार वे कोसी को उसके पुराने रास्ते पर बहाल करने में सोमवार देर शाम को सफल हो ही गए.
दक्षिण-पूर्वी नेपाल में एक आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि अब नदी का सारा पानी उसके असली रास्ते पर बह रहा है जिसने अगस्त के बाद से पश्चिम में नया रास्ता अख्तियार कर लिया था.
तटबंध टूटने के महीनों बाद तक इस पर काम किया जाना असंभव था. अब जाकर कहीं जलस्तर इतना हुआ था कि भारतीय कंपनी इस काम को पूरा कर पाई.
हालाँकि बेघर हुए लाखों लोगों की तकलीफ़ों का अभी अंत नहीं हुआ है.
लाखों लोगों के घरों को तबाह कर और सैकड़ों लोगों की जान लेने के बाद कोसी अब तक गंगा के मैदानी इलाक़े में बह रही थी.
दो महीने पहले बीबीसी ने नेपाल के प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था जहाँ उपजाऊ खेत खलिहानों पर रेत और गाद की मोटी परत जम गई थी जिससे वे खेत खेती के लायक नहीं रहे गए थे.
भारत और नेपाल दोनों ही देशों में हज़ारों लोगों को बेघर होना पड़ा. अब वे बाहरी एजेंसियों और स्थानीय स्वयंसेवकों की मदद पर निर्भर होकर शिविरों में रहने को मजबूर है.












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