रोका जा सकता है दिल का दौरा

नई खोज से उन ख़ून के थक्कों (क्लॉट्स) को बनने से रोका जा सकता है जिनसे दिल का दौरा पड़ता है.
वैज्ञानिकों को विश्वास है कि इस तरीक़े के विकसित होने से दिल का दौरा रोकने और इसके इलाज दोनों में ही मदद मिलेगी.
इस खोज का मक़सद प्लेटलेट्स (रक्त कोशिकाओं) से एक ख़ास प्रोटीन पीकेसी अल्फ़ा को हटाना है. ख़ून के थक्के बनाने में इस प्रोटीन की अहम भूमिका होती है.
सुरक्षा कवच
प्लेटलेट्स छोटी कोशिकाएँ होती हैं जो रक्त वाहिनियों में होने वाले नुक़सान का अंदाज़ा लगाती हैं.
अगर पीकेसी अल्फ़ा को निकाल दिया जाए तो ख़ून के थक्के नहीं बनेंगे प्रोफेसर एलेस्टर पूल
| |
ये कोशिकाएँ बहुत तेज़ी से रक्त वाहिनी में नुक़सान वाली जगह को चारों तरफ़ एक सुरक्षा कवच बना देती हैं.
नुक़सान वाली जगह पर जब कोई धमनी प्लेटलेट्स कोशिकाओं के गुच्छे को नष्ट करती है तो इससे रक्त वाहिनी बंद हो जाती है जो दिल का दौरा पड़ने का कारण होता है.
ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में किए गए इस अध्धयन को क्लीनिकल इनवेस्टीगेशन पत्रिका में प्रकाशित किया गया है.
एंटी-क्लॉटिंग के लिए उपलब्ध एस्पिरिन जैसी दवाइयाँ दौरे के ख़तरे को कम तो करती हैं लेकिन कुछ लोगों में इसके सेवन से ज़्यादा खून बहने की समस्या हो सकती है.
अग्रणी खोजकर्ता प्रोफेसर एलेस्टर पूल का कहना है, "अगर पीकेसी अल्फ़ा को निकाल दिया जाए तो ख़ून के थक्के नहीं बनेंगे."
अध्धयन के लिए धन उपलब्ध कराने वाले संस्थान ब्रिटिश हॉर्ट फ़ाउंडेशन के एसोसिएट डायरेक्टर प्रोफ़ेसर जर्मी पियरसन का कहना है कि क्लॉटिंग रोकने के लिए दवाइयाँ तो हैं लेकिन इनके गंभीर साइड इफ़ेक्ट भी हो सकते हैं.












Click it and Unblock the Notifications