62 लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा

गुरूवार को विशेष अदालत के जज बाबू मैथ्यू पी जोसेफ़ ने ये फ़ैसला सुनाया.
वर्ष 2003 में केरल के कालीकट के निकट मछुआरों के गाँव मराड में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी जिसमें नौ लोग मारे गए थे.
अदालत ने कुल 63 दोषियों में से 62 को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई, जबकि एक अन्य दोषी को धार्मिक संस्थान दुरूपयोग निवारण क़ानून के तहत पाँच साल के कारावास और 2000 रुपए का जुर्माना किया गया है.
गंभीर आरोप
सरकारी वकील पीडी रवि का कहना था उन्होंने अदालत से हिंसा में शामिल सभी दोषियों के लिए मौत की सज़ा की अपील की थी लेकिन ये मामला असाधारण श्रेणी के अंतर्गत नहीं था इसलिए अदालत ने मौत की सज़ा नहीं सुनाई.
ग़ौरतलब है कि इस मामले में कुल 139 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था, जिनमें 76 अभियुक्तों को सबूतों की कमी के आधार पर अदालत पहले ही बरी कर चुकी है.
इस मुक़दमे की सुनवाई फरवरी 2004 में शुरू हुई और अप्रैल 2008 में समाप्त हुई. सज़ा सुनाने से पहले आदालत ने दो बार इस मामले को स्थगित किया क्योंकि जज को रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता थी.
अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों ने कहा है कि अदालत के इस फ़ैसले को वो बड़ी अदालत में चुनौती देंगे.
वर्ष 2003 में कुछ लोगों ने एक ख़ास बिरादरी के मछुआरों पर हमला कर दिया, फलस्वरूप नौ लोग मारे गए जिनमें आठ का संबंध बहुसंख्यक समुदाय से था.
कहा जाता है कि ये हमला इसी इलाक़े में वर्ष 2002 में हुए सांप्रदायिक हिंसा का नतीजा था जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के तीन जबकि बहुसंख्यक समुदाय के दो लोग मारे गए थे.












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