बापू ने भी पहनी थी सेना की वर्दी
बापू ने एंग्लो-बोअर युद्घ के दौरान एक स्वयंसेवी एंबुलेंस यूनिट के सदस्य की हैसियत से सेना की पोशाक पहनी थी। दक्षिण अफ्रीका में गांधी और दूसरे सैकड़ों भारतीय इस यूनिट में शामिल हुए थे। तब वे मोहनदास करमचंद के नाम से जाने जाते थे।
इस रहस्य का खुलासा वषरें पहले 'सैनिक समाचार' जो पहले 'फौजी अखबार' कहा जाता था, ने किया था। इस पत्रिका के सौ साल पूरे होने के मौके पर रिलीज हुई एक कॉफी टेबल बुक 'साल्डिरिंग ऑन' में एक आलेख के साथ इस तस्वीर को प्रकाशित किया गया है।
9 अक्टूबर, 1977 को छपे 'सैनिक समाचार' के अंक में इसके संपादक ज़ेपी. चतुर्वेदी ने लिखा था, "यह लोगों को आश्चर्यचकित कर सकता है कि गांधी ने सैनिक की पोशाक पहनी थी।" इस यूनिट की तब भरपूर सराहना हुई थी। इसमें 1100 स्वयंसेवक थे। तब सेना के कमांडर इन चीफ ने इस यूनिट के साहस की खूब सराहना की थी।
आलेख में लिखा गया है, "बोअर युद्घ के दौरान इस यूनिट के सदस्य घायलों की सेवा करने के लिए रोजाना 20 से 25 मील की दूरी तय करते थे।" इसके पीछे गांधी का उद्देश्य भारतीयों को मुख्यधारा में शामिल कराना भी था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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