मुंबई हमला: जख्मी ताज सुना रहा है दहशतगर्दी की कहानी

मुंबई, 29 नवंबर(आईएएनएस)। मौत के मंजर से गुजर चुके ताजमहल होटल के एक कमरे में टेबुल पर रखे एक कटोरे पर नजर दौड़ते ही इसका अहसास हुए बगैर नहीं होता कि किसी मेहमान को भोजन करने से पहले गोली मार दी गई थी। कमरे की लहुलूहान दीवारों और फर्श को देखकर तबाही का अंदाजा लगया जा सकता है।

करीब 60 घंटों तक आतंकवादियों के चंगुल में रहने के बाद आजाद हुई इस ऐतिहासिक इमारत के अंदरूनी हिस्सों को देखकर भुतहा फिल्मों का नजारा आंखों के सामने तैरना लगता है। चारों ओर खून के गहरे-काले धब्बे, गोलियों और ग्रेनेड की जद में चकनाचूर हुए शीशे के बुरादों, उजड़ी और जली हुई आलमारियों को देखकर सहसा यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यहां आंतकवादियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थी।

अंदर मिठाइयां, चप्पल, जूते, बैग आदि बिखरे पड़े हैं। कई खिड़कियों के पर्दे जलकर खाक हो चुके हैं। मुंबई ही नहीं, बल्कि देश के आतिथ्य उद्योग के इस बेजोड़ नमूने को बदशक्ल बनाने में दहशतगर्दों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। दीवार पर गोलियों के निशान ताज की बर्बादी को बयां करते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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