क्रिकेट बोर्ड अधिकारियों के ख़िलाफ़ मामला

न्यायमूर्ति नादिरा पसायत ने बीसीसीआई के पूर्व प्रमुख जगमोहन डालमिया की एक याचिका पर ये निर्देश दिए हैं.
इस मुद्दे पर बोर्ड के अधिकारियों ने कोई भी टिप्पणी करने से इंकार किया है और कहा कि वो उनके वकील इस मामले को देख रहे हैं.
बोर्ड के पूर्व प्रमुख शरद पवार ने संवाददाताओं से कहा, '' मैं इस पूरे फ़ैसले के बारे में ठीक ठीक नहीं जानता. मुझे अभी पता चला है कि अदालत ने कोई ऐसा फ़ैसला दिया है. जब तक मैं पेपर नहीं देख लेता और वकील से संपर्क नहीं कर लेता तब तक मैं कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं. ''
अदालत के निर्देश के अनुसार बीसीसीआई के पूर्व प्रमुख शरद पवार, वर्तमान प्रमुख शशांक मनोहर और अन्य शीर्ष अधिकारियों ने जगमोहन डालमिया को निकाले जाने के मामले में अदालत में जाली दस्तावेज़ पेश किए थे.
कोर्ट ने ये आदेश एक्स पार्टे दिया है यानि इस आदेश के बचाव के लिए बीसीसीआई के अधिकारी कोर्ट में मौजूद नहीं थे.
अदालत का कहना था कि बोर्ड के अधिकारियों के ख़िलाफ़ भारतीय आपराधिक दंड संहिता की धारा 195 के तहत मामला बनता है.
पवार और शशांक मनोहर के अलावा जिन अधिकारियों के ख़िलाफ़ आरोप हैं वो हैं रत्नाकर शेट्टी (मुख्य प्रशासनिक अधिकारी), निरंजन शाह (पूर्व सचिव), एन श्रीनिवासन (सचिव) और चिरायु अमीन (जूनियर क्रिकेट कमिटी चेयरमैन).
मीडिया से बातचीत करते हुए बोर्ड के पूर्व सचिव निरंजन शाह ने भी पवार की बातें दोहराई और कहा कि उन्हें इसके बारे में जानकारी मिली है और बोर्ड के वकील इस मुद्दे को देख रहे हैं.
हालांकि रात में बोर्ड के अधिकारियों ने फोन बंद कर लिए और प्रतिक्रिया देने से बचते रहे.












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