उल्फ़ा और एनडीएफबी पर प्रतिबंध बढ़ा

असम में हुए धमाकों में 84 लोगों की मौत हो गई थी और 200 लोग घायल हुए थे
भारत सरकार ने असम में हुए धमाकों के बाद इन इलाक़ों में सक्रिय अलगाव-वादी संगठनों पर लगा प्रतिबंध दो साल के लिए बढ़ा दिया है.

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम और नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड पर दो साल के लिए प्रतिबंध बढ़ा दिया है.

सरकार के अनुसार ये दोनों संगठन 30 अक्तूबर को असम में हुए सिलसिलेवार धमाकों के लिए ज़िम्मेदार हैं. हालांकि दोनों संगठनों ने पूर्व में इन धमाकों में हाथ होने से इंकार किया है.

इन दोनों संगठनों पर लगाया गया प्रतिबंध पिछले महीने ख़त्म हुआ था.

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना था, '' हमें इन दोनों सगंठनों के 30 अक्तूबर के धमाकों में शामिल होने के सबूत मिले हैं इसलिए हमने इन पर प्रतिबंध बढ़ाने का फ़ैसला किया है. ''

सरकार का कहना है कि इस बात पर विचार हो रहा है कि एनडीएफबी से दो साल से चल रही बातचीत को जारी रखा जाए या रद्द किया जाए.

इससे पहले बुधवार को असम पुलिस ने इन धमाकों के मामले में बोडो कबीले के कुछ लोगों, भूटान के एक नागरिक तेनज़िंग जी झांगपो और एक स्थानीय नागरिक को गिरफ्तार किया था.

इससे पहले आठ अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है जो असम और बोडो कबीले के हैं.

इस बीच असम के बक्सा ज़िले में पुलिस ने एनडीएफबी के एक शिविर को घेर रखा है. एनडीएफबी का कहना है कि शिविर को घेर कर भारत सरकार ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है.

हालांकि असम सरकार के अनुसार इन शिविरो में छुपे एनडीएफबी के लड़ाकों में से कुछ असम धमाकों के ज़िम्मेदार हैं.

उधर असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने एक सर्वदलीय बैठक के बाद 30 अक्तूबर को हुए धमाकों की जांच सीबीआई को सौंपने का फ़ैसला किया है.

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