विस चुनाव : चुनाव जीतने के लिए हर टोटके आजमा रहे हैं तमाम प्रत्याशी

नई दिल्ली, 12 नवंबर (आईएएनएस)। जिस तरह से अर्जुन ने मछली की छाया देख कर उसकी आंख पर निशाना साधा था, तमाम नेता भी मतदाताओं को साधने के लिए पारलौकिक शक्तियों की ओर नजरें गड़ाए हुए हैं।

नई दिल्ली, 12 नवंबर (आईएएनएस)। जिस तरह से अर्जुन ने मछली की छाया देख कर उसकी आंख पर निशाना साधा था, तमाम नेता भी मतदाताओं को साधने के लिए पारलौकिक शक्तियों की ओर नजरें गड़ाए हुए हैं।

ये नेता चुनाव जीतने के लिए किताबों में वर्णित हर टोटके आजमा रहे हैं। ताबीजों, पवित्र धागों व पत्थरों को धारण करने के साथ ही वे अपने परिचित ज्योतिषियों के यहां लगातार चक्कर लगा रहे हैं।

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, मिजोरम, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर सभी राज्यों के प्रत्याशी ज्योतिषियों, पुरोहितों, हस्तरेखा विशेषज्ञों के पास कतार लगाए हुए हैं।

इस कतार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी से लेकर दिल्ली विधानसभा के लिए जोर आजमा रहे उम्मीदवार तक शामिल हैं।

ज्योतिषियों से सलाह लिए बगैर भाजपा अपने किसी कार्यक्रम के समय व तारीख की घोषणा नहीं करती। राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए ज्योतिषी से सलाह के बाद ही 9 नवंबर को प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की गई।

बेंगलुरू के प्रसिद्ध ज्योतिषी दैवग्न्य सोमैयाजी के अनुसार चुनाव के दिनों में उनकी व्यस्तता बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इस बार चूंकि 6 राज्यों में एक साथ चुनाव हो रहे हैं, लिहाजा उनकी व्यस्तता कुछ ज्यादा बढ़ गई है।

कर्नाटक में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा को नियमित सलाह देने वाले सोमैयाजी ने आईएएनएस को बताया कि वह विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं का चुनावी भविष्य बताने में इन दिनों पूरी तरह व्यस्त हैं।

हालांकि ज्यादातर नेता इन बातों को जाहिर करने में संकोच करते हैं, लेकिन कुछ नेता ज्योतिषियों से सलाह की बात सहर्ष स्वीकार करते हैं। दिल्ली में भाजपा विधायक सुशील चौधरी ने बताया कि उन्होंने अपने दो पसंदीदा पुरोहितों से सलाह लेने के बाद ही नामांकन दाखिल किया।

कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल भी स्वीकारते हैं कि वह हमेशा अपने पुरोहित हरीश शर्मा से सही मुहूर्त विचारने के बाद ही नामांकन दाखिल करते हैं और प्रचार अभियान शुरू करते हैं।

छत्तीसगढ़ के राजस्व व वनमंत्री बृजमोहन अग्रवाल कहते हैं कि ज्योतिषियों में उन्हें पूरा भरोसा है। इसके जरिए अक्सर भावी अच्छे-बुरे दिन के बारे में संकेत मिल जाता है।

इस मामले में मध्यप्रदेश के मुस्लिम प्रत्याशी भी पीछे नहीं हैं। कई सारे प्रत्याशी चुनाव जीतने के लिए कुरान खानी की परंपरा में जुटे हुए हैं। इस परंपरा के तहत एक बार में पूरे कुरआन शरीफ का पाठ किया जाता है।

दिल्ली की ज्योतिषी सविता शर्मा कहती हैं कि उनके यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख ही नहीं बल्कि ईसाई नेता भी सलाह के लिए आते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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