सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेगी सरकार
नई दिल्ली, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के यूनियनों के प्रस्तावित दो-दिनी हड़ताल रोकने के प्रयासों के तहत केंद्र सरकार ने इन बैंकों में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने और इनका नियंत्रण एवं प्रबंधन निजी हाथों में नहीं सौंपने का वादा किया है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने रविवार को जारी अपने बयान में कहा, "सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का नियंत्रण और प्रबंधन निजी क्षेत्र को स्थानांतरित करने संबंधी सरकार का कोई प्रस्ताव नहीं है।"
इससे पहले 'यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियनंस' (यूएफबीयू) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण और विलय के खिलाफ इस महीने की 24 एवं 25 तारीख को हड़ताल पर जाने का फैसला किया था।
वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 51 प्रतिशत से कम हिस्सेदारी नहीं रखेगी और ये सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बने रहेंगे।"
यूएफबीयू बैंकों का सर्वोच्च मंच है, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के नौ यूनियनों एवं एसोसिएशनों का प्रतिनिधित्व करता है। इस मंच ने पेंशन विकल्प, अनुकंपा नियुक्ति और वेतनमान संशोधन जैसे मुद्दों पर 'इंडियन बैंक्स एसोसिएशन' (आईबीए) के साथ हुई सहमति के प्रावधानों के शीघ्र कार्यान्वयन की मांग भी की है।
सरकार ने वित्तीय सेवा क्षेत्र के विकास संबंधी रघुराम राजन और अनवारुल होडा की अध्यक्षता वाली समिति की सिफरिशों पर भी अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है।
वित्त मंत्रालय ने बैंकों के प्रस्तावित हड़ताल को अनावश्यक और अनुचित करार देते हुए कहा है कि जनता को काफी परेशानी होगी, क्योंकि एक अनुमान के मुताबिक औसतन 80 लाख लोग रोजाना सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शाखाओं में जाते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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