धीमी पड़ी आर्थिक विकास की गति (लीड-1)
नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। तेज मुद्रास्फीति यानी बढ़ती हुई महंगाई को नियंत्रित करने के लिए किए गए उपायों की वजह से देश की आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ गई है। साढ़े तीन साल में पहली बार आर्थिक विकास दर आठ प्रतिशत से नीचे चली गई।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान देश की अर्थव्यवस्था का विकास 7.9 प्रतिशत की दर से हुआ। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह दर 9.2 प्रतिशत थी।
देश की आर्थिक सेहत में इस गिरावट के लिए भारतीय रिजर्व बैंक यानी 'आरबीआई' की कड़ी मौद्रिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने चालू वित्त वर्ष के दौरान देश की आर्थिक विकास दर 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। हालांकि वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने हाल ही में इसके आठ प्रतिशत के आस-पास बने रहने की उम्मीद जताई थी।
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन यानी 'सीएसओ' की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़े बताते हैं कि पहली तिमाही में आर्थिक विकास दर पिछले साढ़े तीन साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया। इससे पहले की तिमाही यानी पिछले वित्त वर्ष (2006-07) की चौथी तिमाही में आर्थिक विकास दर 8.8 प्रतिशत थी।
गौरतलब है कि उद्योग जगत ने हाल ही में चिंता जताई थी कि महंगाई की दर यानी मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के लिए अपनाई गई कड़ी मौद्रिक नीतियों और ऊंचे ब्याज दरों का विनिर्माण क्षेत्र के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
सीएसओ के आंकड़ों से उद्योग जगत की चिंता की पुष्टि हुई है। आंकड़े दर्शाते हैं कि पहली तिमाही के दौरान सबसे ज्यादा गिरावट विनिर्माण क्षेत्र में दर्ज की गई। इस अवधि में विनिर्माण क्षेत्र की विकास दर 5.6 प्रतिशत रह गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 10.9 प्रतिशत थी।
इस अवधि में कृषि क्षेत्र का विकास दर भी महज तीन प्रतिशत रही। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 4.4 प्रतिशत थी।
शेष छह क्षेत्रों में केवल निर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन बेहतर रहा। पहली तिमाही में इस क्षेत्र की विकास दर 11.4 प्रतिशत रही जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान 7.7 प्रतिशत थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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