चंबल से पाठा तक खूंखार डकैतों से मिली मुक्ति

भोपाल, 4 अगस्त (आईएएनएस)। चंबल के बीहड़ से लेकर बुंदेलखंड के पाठा इलाके तक की पहचान खूंखार डकैतों के कारण ही रही है। इस इलाके में डकैत कुछ इस तरह पनपते रहे हैं जैसे उन्हें बनाने वाले कारखाने यहां चल रहे हो।

चित्रकूट में पांच लाख के इनामी डकैत अंबिका प्रसाद पटेल उर्फ ठोकिया के मारे जाने के साथ ही इस पूरे इलाके को खूंखार डकैतों से लगभग मुक्ति मिल गई है।

आज से पांच वर्ष पहले की स्थिति पर अगर नजर दौड़ाई जाए तो चंबल इलाके में एक दर्जन से अधिक डकैत गिरोहों के नाम सामने आ जाते हैं। तब आलम यह था कि निर्भय सिंह गुर्जर, पहलवान सिंह गुर्जर, रज्जन गुर्जर, चंदन यादव, जगजीवन परिहार, रामाश्रेय तिवारी उर्फ फक्कड़, अरविंद गुर्जर, रामवीर गुर्जर के गिरोह चंबल के बीहड़ों में सक्रिय थे। वहीं बुंदेलखंड में शिवप्रसाद पटेल उर्फ ददुआ और अंबिका प्रसाद पटेल उर्फ ठोकिया का बोल बाला था।

मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश पुलिस द्वारा चलाए गए विशेष अभियानों का नतीजा यह है कि अधिकांश डकैत गिरोह ढेर हो चुके हैं। इनमें से बचे गिरोह रामाश्रय तिवारी, कुसमा नाइन, अरविंद गुर्जर और रामवीर गुर्जर आत्म समर्पण कर जेल पहुंच चुके हैं। ठोकिया के मारे जाने के साथ ही चंबल से पाठा तक के इलाके को खूंखार डकैत गिरोहों से मुक्ति मिल गई है।

पिछले छह दशक के डकैतों के इतिहास पर नजर डाली जाए तो एक बात साफ हो जाती है कि इस पूरे इलाके में जयप्रकाश नारायण के आत्मसमर्पण आंदोलन के बाद कभी भी ऐसा वक्त नहीं आया है जब यह इलाका पूरी तरह डकैत विहीन हुआ हो।

डकैतों के समर्पण और खात्मे का दौर तो चलता रहा है मगर एक भी डकैत गिरोह इस इलाके में न बचा हो ऐसी स्थितियां संभवत: पहली बार आई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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