नोबल पुरस्कार विजेता महान रूसी साहित्यकार सोल्झेनित्सिन नहीं रहे (लीड-1)
मास्को, 4 अगस्त (आईएएनएस)। नोबल पुरस्कार विजेता रूसी साहित्यकार अलेक्जेंडर सल्झेनित्सिन का दिल का दौरा पड़ने के कारण 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सल्झेनित्सिन को सोवियत मजदूर शिवरों की स्थिति का चित्रण करने पर देश से निकाल दिया गया था।
पूर्व सोवियत संघ के मजदूर शिविरों की जिंदगी और स्टालिन के आतंक के बारे में लिखने वाले विख्यात उपन्यासकार और इतिहासकार सोल्झेनित्सिन का रविवार देर रात मास्को स्थित उनके आवास पर निधन हुआ।
उनके पुत्र स्टीफेन के हवाले से समाचार एजेंसी इतर-तास ने यह जानकारी दी है। रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव ने सोल्झेनित्सिन के निधन पर शोक व्यक्त किया है। प्रताड़ित और बंधुआ मजदूरों के बारे में लिखने पर 1974 में सोल्झेनित्सिन को सोवियत संघ से निकाल दिया गया था।
विश्वविख्यात इस साहित्यकार को पिछले कुछ महीनों से सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया था। कहा जा रहा था कि वे बीमार थे।
सोल्झेनित्सिन की मुख्य रचना 'गुलाग आर्चिपेलैगो' थी जो सन 1973 में पश्चिमी देशों में प्रकाशित हुई थी। इसमें स्टालिन के समय के 'आतंक' का जिक्र है।
एक समय देश से निकाले जा चुके सोल्झेनित्सिन को सन 2007 में सर्वोच्च रूसी नागरिक सम्मान 'द रशियन स्टेट प्राइज' से सम्मानित किया गया।
पिछले साल सम्मान की घोषणा करते हुए रशियन एकेडमी ऑफ साइंस के अध्यक्ष यूरी ओसिपोव ने सोल्झेनित्सिन को एक ऐसा लेखक करार दिया था जिनके कामों के बिना 20वीं शताब्दी के इतिहास के बारे में सोचा नहीं जा सकता है।
सोल्झेनित्सिन की प्रमुख रचना 'एव डे इन द लाइफ ऑफ इवान डेनिसविच' सन 1963 में अंग्रेजी में प्रकाशित हुई थी। उस वक्त शीत युद्ध चरम पर था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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