दमा के परंपरागत इलाज के लिए हैदराबाद में जुटा रोगियों का हुजूम
हैदराबाद, 8 जून (आईएएनएस)। देश के कई हिस्सों से इस बार भी यहां पर मछली के माध्यम से दमा का इलाज कराने के लिए बड़ी संख्या में रोगी आए हैं, लेकिन पहले की तुलना में यह संख्या घटी है।
गत 160 सालों से भी अधिक समय से हर साल इस हर्बल दवा को दे रहे बाथिनी गौड परिवार ने शनिवार रात से दवा बांटने का काम जारी रखा हुआ है। इस परिवार के 300 से भी अधिक सदस्य रातभर दवा बांटने के काम में लगे रहे।
उल्लेखनीय है कि यह दवा 'प्रसादम' कहलाती है और इसे ज्येष्ठ महीने में मृगशिरा और कृतिका नक्षत्र के मौके पर दमा के रोगियों को दिया जाता है। इसके समय का निर्धारण ज्योतिषी करते हैं। उसके बाद गौड परिवार दवा देने के पहले दूधबोवली स्थित अपने पैतृक निवास पर परंपरागत पूजा करता है।
इस बार राज्य भाजपा अध्यक्ष बंडारु दत्तात्रेय और सांसद अंजन कुमार यादव उन शुरुआती लोगों में से थे जिन्हें यह दवा दी गई।
गौरतलब है कि यह दवा पीले रंग की हर्बल पेस्ट के साथ तीन सेंटीमीटर लंबी मुरल मछली होती है। इस पेस्ट के बारे में जानकारी बाथिनी परिवार तक ही सीमित है।
इस परिवार का दावा है कि 1845 में एक पवित्र व्यक्ति ने इस आश्चर्यजनक दवा के बारे में उनके पूर्वज वेराना गौड को बताया था। गौड ने उनसे यह वादा किया था कि वे यह दवा मुफ्त में देंगे और परिवार के सदस्यों के बाहर के किसी भी व्यक्ति को इस दवा के नुस्खे की जानकारी नहीं देंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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