किसी रहनुमा की बाट जोह रहा है रुडयार्ड किपलिंग का बंगला
इलाहाबाद, 8 जून (आईएएनएस)। 'किम' और 'जंगलबुक' सरीखी बेमिसाल कृतियों के रचयिता रुडयार्ड किपलिंग का बंगला आज जर्जर हालत में है और अपने जीर्णोद्धार के लिए किसी रहनुमा की बाट जोह रहा है।
इलाहाबाद, 8 जून (आईएएनएस)। 'किम' और 'जंगलबुक' सरीखी बेमिसाल कृतियों के रचयिता रुडयार्ड किपलिंग का बंगला आज जर्जर हालत में है और अपने जीर्णोद्धार के लिए किसी रहनुमा की बाट जोह रहा है।
किपलिंग ने 1888 से 1889 तक का वक्त मोतीलाल नेहरू रोड के समीप स्थित इसी बंगले में गुजारा था। उन दिनों वह इलाहाबाद में पाइनियर अखबार के सहायक संपादक थे।
बंगले के मालिक एक लंबे अर्से से उत्तर प्रदेश की सरकारों और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इसे खरीदने की गुहार लगाते रहे हैं, लेकिन दोनों ने ही इस दिशा में कुछ विशेष ध्यान नहीं दिया और अब यह बंगला जर्जर हो चुका है। इस बंगले के आसपास का भूखंड पहले ही बिक चुका है।
विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आर.पी. मिश्रा ने आईएएनएस को बताया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 1985 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को एक पत्र लिखकर इस बंगले को खरीदने के लिये अनुदान जारी करने का अनुरोध किया था। श्री मिश्रा के विश्वविद्यालय छोड़ देने के बाद किसी अन्य से इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया।
बंगले के मालिक सुधीर टंडन के मुताबिक, उन्होंने ने भी कई बार सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से इस बंगले को उचित दामों पर खरीद लेने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने इसे खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
टंडन ने बताया कि उन्होंने 1985 में मिश्रा से भी इस बारे में अनुरोध किया था। उसके बाद उन्होंने जमीन का 70 फीसदी हिस्सा कमजोर वर्ग एवं कर्मचारी सहकारी गृह समिति को बेच दिया। बंगला बाकी के 30 फीसदी हिस्से पर स्थित है।
टंडन का कहना है कि वह किपलिंग जैसी शख्सियत की अहमियत समझते हैं यदि सरकार दिलचस्पी दिखाए, तो वह यह बंगला उसे बेच देंगे।
मिश्रा और टंडन अकेले नहीं हैं, जिन्होंने इस बारे में प्रशासन से संपर्क किया। इन दोनों के अलावा, 2007 से इस बंगले से संचालित गवर्नमेंट नर्सरी ट्रेनिंग कॉलेज के प्रधानाचार्य भी इस बंगले के रखरखाव के मसले पर दर्जनों बार प्रशासन को लिख चुके हैं।
संपर्क करने पर विश्वविद्यालय के वर्तमान वित्तीय अधिकारी जे.एन. मिश्रा ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस बारे में विश्वविद्यालय के पंजीयक से संपर्क कीजिए , जबकि पंजीयक का कहना था कि वह छुट्टी पर हैं, लिहाजा इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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