घट रही है बड़ी विमानन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी

मुंबई, 2 जून (आईएएनएस)। विमान ईंधन की कीमतें बढ़ने से किराए में हुई वृद्धि के कारण बड़ी विमानन कंपनियों के यात्री अब अपेक्षाकृत छोटी और किफायती कंपनियों का रुख करने लगे हैं।

गौरतलब है कि इस वर्ष अब तक हवाई किराए में 18 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हो चुकी है। अब शनिवार को हुई विमान ईंधन की कीमतों में 19 प्रतिशत की वृद्धि से हवाई यात्रा के और महंगे होने की आशंका जताई जा रही है।

विमानन उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले साल विमान ईंधन की कीमतों में 30-43 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। फिलहाल विमान ईंधन की दर मुंबई में 71,759.06 रुपये और नई दिल्ली में 69,227.08 रुपये प्रति किलोलीटर है।

विमान ईंधन की कीमतों में हुई ताजा वृद्धि से महंगे ईंधन के कारण पहले से ही परेशानियों का सामना कर रही विमानन कंपनियां यात्री किराया बढ़ाने के लिए मजबूर हो जाएंगी।

विश्लेषकों का कहना है कि ईंधन की कीमतें बढ़ने से पहले से ही महंगी बड़ी विमानन कंपनियों की सेवाएं और महंगी हो जाएंगी, लेकिन किफायती विमानन कंपनियों की सेवाएं अपेक्षाकृत कम महंगी रहेंगी। ऐसे में यत्रियों का किफायती विमानन कंपनियों की ओर रुख करना स्वभाविक है।

नागरिक उड्डयन महानिदेशायल (डीजीसीए) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष इंडिगो, स्पाइसजेट और गोएयर जैसी किफायती विमानन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 22 प्रतिशत तक पहुंच गई। वर्ष 2006 में यह केवल 12 प्रतिशत थी।

स्पाइसजेट के एक अधिकारी ने कहा, "इस वर्ष हमारी बाजार हिस्सेदारी और बढ़ेगी।"

उधर सिटीग्रुप बैंक के विश्लेषकों के मुताबिक इस वर्ष अब तक कारपोरेट यात्रियों की संख्या में 38 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है, उम्मीद जताई जा रही है कि यह 45 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। लेकिन इससे महंगी विमनन कंपनियों को कम ही फायदा होगा, क्योंकि कारपोरेट यात्री अब किफायती विमानन सेवाओं का रुख करने लगे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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