सिर्फ नुकसानदायक ही नहीं है जैव-ईंधन
लंदन, 2 जून (आईएएनएस)। जैव-ईंधन दुनिया के गरीबों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है और उन्हें उनकी जमीन से दूर कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद सभी जैव-ईंधन सिर्फ नुकसानदायक ही नहीं हैं।
यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन(एफएओ) और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण एवं विकास संस्थान (आईआईईडी)की ओर से आज प्रकाशित रिपोर्ट में दी गयी।
रिपोर्ट के मुताबिक, सभी प्रकार के जैव-ईंधन समान नहीं होते। रिपोर्ट में ऐसे नीतियां अपनाने की सिफारिश की गयी है, जिनसे विकासशील देशों में गांवों में रहने वाले गरीबों को जैव-ईंधन के उत्पादन से होने वाले मुनाफ ों में वृद्धि हो सकती है।
आईआईईडी के प्रमुख लेख लोरेंजो कोटुला के मुताबिक,जैव-ईंधन सिर्फ अच्छे या बुरे नहीं हो सकते। ये या तो दुनिया के गरीबों के लिये मददगार हो सकते हैं या फिर नुकसानदायक। उनका मददगार या नुकसानदायक होना फसल की किस्म, फसल प्रणाली, व्यापार मॉडल और स्थानीय सरोकारों तथा नीतियों पर निर्भर करता है।
जैव-ईंधन को वनों की कटाई और खाद्यान्न उत्पादन के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली जमीनों में कमी के लिये जिम्मेदार ठहराने के बावजूद आने वाले वर्षो में इसका उत्पादन और बढ़ेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जैव ईंधन की वजह से भारत, इंडोनेशिया, पापुआ न्यू गिनी, मोजांबिक, तंजानिया और कोलंबिया में रहने वाले गरीब प्रभावित हो रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े और छोटे जैव-ईंधन उत्पादकों का अस्तित्व बचा रह सकता है, बशर्ते सरकारे और निजी क्षेत्र सही नीतियां और व्यवहार अपनाये।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस












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