गुर्जर आरक्षण के प्रस्ताव का औचित्य बताए राजस्थान सरकार : कानून मंत्रालय
नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने आज राजस्थान सरकार से कहा है कि वह गुर्जर समुदाय के लोगों को अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने से संबंधित प्रस्ताव का औचित्य बताए। मंत्रालय ने इस मुद्दे पर न्यायोचित प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव भी दिया है।
कानून मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि उनके मंत्रालय ने राजस्थान के मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के पत्र की जांच के बाद अपनी राय गृह मंत्रालय को भेज दिया है। राजे ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजे अपने पत्र में गुर्जर समुदाय के लिए चार से छह प्रतिशत आरक्षण कोटे की मांग की थी।
अधिकारी ने कहा, "राजे के प्रस्ताव का कोई कानूनी औचित्य नहीं था। राज्य सरकार को कानून के लिहाज से उचित प्रस्ताव भेजना चाहिए।"
अधिकारी का कहना है कि गुर्जर समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने से संबंधित मामले में राज्य सरकार और जनजाति मामलों के मंत्रालय को कानून मंत्रालय से मशवरा लेकर कोई न्यायोचित प्रस्ताव तैयार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गुर्जर समुदाय के लोगों की संख्या, उनकी परंपराएं, रीति-रिवाज और जीवनशैली के आधार पर उनके लिए आरक्षण का प्रस्ताव तैयार करने की जरूरत है।
अधिकारी ने संविधान की अनुच्छेद 16 (4) और इसके उप खंड का हवाला देते हुए कहा कि देश में राज्य सरकारों को राज्य के पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण देने के लिए कानून बनाने का अधिकार है।
अधिकारी के मुताबिक कानून मंत्रालय ने राजस्थान सरकार को महाराष्ट्र सरकार के उस कानून का अध्ययन करने को भी कहा है जिसके तहत वहां के खानाबदोश जनजातियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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