धर्मनिरपेक्ष नहीं पंथनिरपेक्ष कहें : राजनाथ (लीड-2)

नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने धर्मनिरपेक्ष शब्द के संवैधानिक प्रयोग पर रोक लगाने जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी आदेश के जरिए धर्मनिरपेक्ष शब्द के संवैधानिक प्रयोग को प्रतिबंधित कर देना चाहिए।

दिल्ली में संसदीय सौध में आज से शुरू हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में राजनाथ सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा, "सेक्युलर शब्द की सही व्याख्या धर्मनिरपेक्ष नहीं बल्कि पंथनिरपेक्ष है।" उन्होंने कहा कि भारत न कभी धर्म निपरेक्ष था, न धर्मनिरपेक्ष है और न कभी धर्मनिरपेक्ष हो सकता है।

उन्होंने कहा कि पंथनिरपेक्ष के स्थान पर धर्मनिरपेक्ष शब्द का प्रयोग न सिर्फ गलत और असंवैधानिक है बल्कि भारत के सभी राजकीय प्रतीकों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह भारत के वास्तविक स्वरूप का अपमान भी है।

राजनाथ ने कहा, "सेक्युलर शब्द के दुरूपयोग ने भारत की राजनीति को जितना दूषित किया है और जनता में जितना भ्रम उत्पन्न किया है, उसकी कल्पना नहीं की जा सकती।" उन्होंने कहा कि सेक्युलर शब्द का अर्थ धर्मनिरपेक्ष कदापि नहीं होता। न तकनीकी दृष्टि से और न राजनैतिक दृष्टि से।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारत सरकार के विधि व न्याय मंत्रालय ने भी संविधान की प्रस्तावना का जो हिन्दी अनुवाद आधिकारिक रूप से प्रकाशित किया है उसमें भी सेक्युलर शब्द का अर्थ पंथनिरपेक्षता बताया गया है। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष शब्द का प्रयोग किसी प्रकार की व्याख्या से दूर नहीं हो सकता। इसका सिर्फ एक ही रास्ता है कि धर्मनिरपेक्ष शब्द का प्रयोग ही समाप्त कर दिया जाए। राजनाथ ने इस मौके पर घोषणा की आगे से भाजपा कभी भी धर्मनिरपेक्ष शब्द का प्रयोग नहीं करेगी।

कर्नाटक की जीत के उत्साह और गुर्जर आंदोलन के साये में शुरू हुई इस बैठक में राजनाथ सिंह ने कहा कि पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की जनता ने अपने फैसले से संप्रग सरकार के चार वर्ष के कार्यकाल का जो रिपोर्ट कार्ड दिया है, लोकतंत्र में वही असली रिपोर्ट कार्ड है।

राजनाथ ने सभी राजनीतिक दलों से आह्वान किया कि वे सभी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार पर यह दबाव बनाएं कि कृषि समस्या पर चर्चा करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि और खाद्यान संकट के समाधान के लिए कम से कम 10 वर्ष की अपनी दीर्घकालिक योजना लेकर आए। इस पर संसद में चर्चा हो और इसके अंतिम निष्कर्ष को गांव, गरीब और किसान के लिए संसद का संकल्प माना जाए।

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बजट भाषण को भ्रामक करार देते हुए राजनाथ ने कहा कि तीन महीने पहले केंद्र सरकार द्वारा पेश किया बजट ठोस यथार्थ पर आधारित न होकर पूरी तरह से राजनीतिक उदेश्यों की पूर्ति के लिए था। उन्होंने दावा किया कि वित्त मंत्री के बजट के बाद आम आदमी की समस्या और बढ़ी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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