लिट्टे के साथ बातचीत नहीं कर सकता श्रीलंका : राजनयिक
नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। श्रीलंका के एक प्रमुख राजनयिक का मानना है कि वहां के जातीय संघर्ष का बातचीत के जरिये हल निकल सकता है, बशर्ते "तमिल विद्रोही सशस्त्र संघर्ष छोड़े और लोकतांत्रिक तरीका अपनाए।"
नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। श्रीलंका के एक प्रमुख राजनयिक का मानना है कि वहां के जातीय संघर्ष का बातचीत के जरिये हल निकल सकता है, बशर्ते "तमिल विद्रोही सशस्त्र संघर्ष छोड़े और लोकतांत्रिक तरीका अपनाए।"
राजनयिक दयान जयतिलका ने एक भेंटवार्ता में कहा कि संघर्ष का दौर तभी थमेगा, जब लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) प्रमुख वेलूपिल्लै प्रभाकरण संघर्ष का रास्ता छोड़े या रास्ते से हटा दिए जाएं।
श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का करीबी समझे जाने वाले जयतिलका से यह पूछा गया था कि क्या 70 हजार से ज्यादा लोगों की मौत का कारण बने इस संकट का हल बातचीत से निकल सकता है।
जयतिलका ने जिनेवा से भेजे ई-मेल में 1991 के राजीव गांधी हत्याकांड का हवाला देते हुए कहा है कि प्रभाकरन के साथ कोई शांति संभव नहीं।
उन्होंने कहा, "इस मसले का बातचीत के जरिये शांतिपूर्ण हल तभी संभव है, जब लिट्टे यह माने कि कोई भी समाधान संयुक्त श्रीलंका में ही संभव है और तमिल विद्रोहियों को हथियार डालने होंगे तथा लोकतंत्र कबूलना होगा।"
यह पूछने पर कि श्रीलंका में जारी संघर्ष कैसे थमेगा, जयतिलका ने कहा कि यह संघर्ष उसी तरह थमेगा, जैसे अंगोला में थमा है, जहां विद्रोही नेता जोनास साविम्बि के अंगोलाई सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाने के बाद दशकों से जारी संघर्ष रुक गया।
उन्होंने कहा, "यह संघर्ष उसी तरह थमेगा, जैसे चेचन्या में रूसी सेना द्वारा दजोकर दूदायेव को पकड़ने, चेचन अलगाववादी मिलिशिया को हराने के बाद संघर्ष थम गया था। अंगोला और चेचन्या इस समय शांतिपूर्ण और समृद्ध हैं। "
जयतिलका ने कहा, "संघर्ष तब तक थम नहीं सकता जब तक प्रभाकरन किसी भी तरह हथियार नहीं डाल देता।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस












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