एंड्रोजन की कमी से जूझ रहे लोग प्राय: लेते हैं गलत इलाज
वाशिंगटन, 27 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया है कि 'एंड्रोजन' (पुरुषों में पाया जाने वाला हार्मोन) की कमी होने से यौन दुर्बलता और ऑस्टिपोरोसिस (हड्डी की बीमारी) से जूझ रहे लोगों में कई बार इलाज भी कारगर साबित नहीं हो पाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे इसका गतल तरीके से इलाज कराते हैं।
'न्यू इंग्लैंड रिसर्च इंस्टीट्यूट' के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि पुरुषों में 'टेस्टोस्टेरोन' की कमी से होने वाली बीमारियों जैसे नींद न आना, अवसाद और थकान का इलाज तो संभव है लेकिन 'एंड्रोजन' की कमी से होने वाली बीमारियों का इलाज अभी तक नहीं ढूंढा जा सका है।
शोधकर्ता सुजेन ए.हाल ने कहा, "इसका कारण हमें अभी तक पता नहीं चल पाया है। इस पर अभी और अध्ययन किए जाने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा कि कई बार कई पुरुष सामाजिक-आर्थिक परेशानियों के कारण भी 'एंड्रोजन' का शुरुआत में ही इलाज नहीं करवा पाते हैं। वे अपने तरीके से 'टेस्टोस्टेरोन' की जेल या क्रीम का इस्तेमाल करके अपना तात्कालिक इलाज कर लेते हैं।
शोधकर्ताओं ने 46.4 वर्ष की औसत आयुवर्ग वाले 1,486 लोगों पर यह अध्ययन किया जिनमें से 97 लोग एंड्रोजन की कमी से जूझ रहे थे, 87 में इसका लक्षण था और 11 का इलाज 'टेस्टोस्टेरोन' वाली पद्धति से किया जा रहा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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