आधुनिक नृत्य केवल शारीरिक व्यायाम हैं : सरोजा देवी

नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। भरतनाट्यम की जानी-मानी नृत्यांगना एम. के. सरोजा देवी का मानना है कि आधुनिक भारतीय नृत्य केवल "शारीरिक व्यायाम हैं, बौद्धिक नहीं।"

गुरुवार को एम. के. सरोजा देवी और मशहूर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीतज्ञ गिरिजा देवी को 'लीजेंड्स ऑफ द इंडिया लाइफटाइम' पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दोनों कला दिग्गजों को 25 हजार रुपये नकद, प्रशस्ति पत्र और पदक प्रदान किया गया। इस अवसर पर 77 वर्षीय सरोजा देवी के सुपुत्र आशीष खोकर द्वारा संकलित उनके बचपन से 70 वर्ष की आयु तक की तस्वीरों के संग्रह का भी विमोचन किया गया।

सरोजा देवी ने इस मौके पर कहा कि उन्हें शास्त्रीय नृत्य की विधियों में छेड़खानी किया जाना पसंद नहीं। उन्होंने कहा, "मैं एक ऐसी संस्कृति प्रेमी हूं जो सब कार्य बिल्कुल मौलिक तरीके से करना पसंद करती हूं। मेरा मानना है कि सभी शास्त्रीय कलाओं और नृत्य विधाओं में ईश्वर का वास है।"

उन्होंने कहा, "आधुनिक नृत्य नकली हैं। उनमें श्रद्धा नहीं है। यह माया की तरह है, जो क्षणिक होती है। यह केवल शरीर के लिए अच्छे हैं, मस्तिष्क के लिए नहीं।"

गत सात दशकों से नृत्यकला में अनेक कीर्तिमान स्थापित कर चुकीं सरोजा देवी ने सन 1930 के दशक से चिदंबरम के विदवान कट्टमनार कोइल से मद्रास स्थित घर में अपनी बहन के साथ भरतनाट्यम की विधिवत शिक्षा लेनी शुरू की थी। मात्र 16 वर्ष की आयु में उनकी गिनती मद्रास की 10 सर्वश्रेष्ठ भरतनाट्यम नृत्यांगनाओं में होने लगी थी।

बाद में उन्होंने तीन तमिल फिल्मों 'नल-तम्बी', 'पैथ्यकरण' और 'कृष्ण भक्ति' में भी काम किया। जैमिनी स्टूडियो की ओर से उन्होंने फिल्म की बड़ी पेशकश मात्र इसलिए ठुकराई क्योंकि उनकी पहली प्राथमिकता उनका घरेलू जीवन था। उनका विवाह देश के सबसे प्रसिद्ध नृत्यकार मोहन खोकर से हुआ था जो महान नृत्य गुरु उदय शंकर के शिष्य थे।

सरोजा देवी कहती हैं, "भरतनाट्यम सभी नृत्य विधाओं का मूल है। यह शिव की स्तुति का अलौकिक नृत्य है। मैं जब भी नाचती हूं तब-तब मुझे आध्यात्मिक अनुभूति होती है और इसी अनुभव ने मुझे इतने वर्षो तक नृत्य करते रहने को प्रेरित किया है।"

वह इस तर्क से इंकार करती हैं कि शास्त्रीय नृत्य अपनी पहचान खो रहे हैं। उनके अनुसार, "भारत अपनी परंपरा से कटा नहीं है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत विदेशों में बहुत लोकप्रिय हैं। लंदन, पेरिस और अमेरिका से भी लोग मेरे पास सीखने आते हैं, लेकिन उन्हें देश में और प्रोत्साहन दिए जाने की जरूरत है।"

सरोजा देवी बड़ौदा के एम.एस. विश्वविद्यालय में नृत्य की शिक्षा देती रही हैं जहां उनके पति ने नृत्य विभाग की शुरुआत की थी। उनकी कुछ मशहूर शिष्याओं में यामिनी कृष्णमूर्ति और इंद्राणी रहमान रही हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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