तेल की कीमतों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी

नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर ओपेक राष्ट्र व विकसित देशों के बीच आरोप -प्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ओपेक राष्ट्र जहां कीमतों में तेजी के लिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दोषी करार दे रहे हैं, वहीं अमेरिका व अन्य विकसित देश ओपेक राष्ट्रों के इस दावे को बेबुनियाद बताते हुए आपूर्ति संकट को मौजूदा स्थिति के लिए कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर ओपेक राष्ट्र व विकसित देशों के बीच आरोप -प्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ओपेक राष्ट्र जहां कीमतों में तेजी के लिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दोषी करार दे रहे हैं, वहीं अमेरिका व अन्य विकसित देश ओपेक राष्ट्रों के इस दावे को बेबुनियाद बताते हुए आपूर्ति संकट को मौजूदा स्थिति के लिए कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

दोनों तरफ के आरोप प्रत्यारोप से इतर अगर वास्तविक हालात पर निगाह दौड़ाई जाए तो इस बात की कमोबेश पुष्टि होती है कि कीमतों में वृद्धि के लिए आपूर्ति संकट की तुलना में डालर में कमजोरी व सट्टेबाजी ज्यादा जिम्मेदार हैं। मौजूदा सप्ताह के दौरान अमेरिकी ऊर्जा व प्रशासन विभाग से जारी आंकड़े भी इसी बात की पुष्टि करते नजर आते हैं।

अमेरिकी ऊर्जा मंत्रालय के सूचना व प्रशासन विभाग से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार 16 मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश में क्रूड के स्टाक में 53 लाख बैरल की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों को अनुमान था कि समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान क्रूड के स्टाक में 50 लाख बैरल तक की वृद्धि हो सकती है।

आंकड़ों में हालांकि हीटिंग आयल के स्टाक में समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान 7.28 लाख बैरल वृद्धि की बात कही गई है। वहीं गैसोलिन के स्टाक में समीक्षाधीन अवधि के दौरान 7.55 लाख बैरल की कमी दर्ज की गई। विश्लेषक हीटिंग आयल व गसोलिन दोनों में क्रमश: 12 लाख व 4 लाख बैरल की वृद्धि का अनुमान लगा रहे थे। बाजार विश्लेषकों के अनुसार अनुमान से उलट आए इन्वेंटरी आंकड़ों से तेल की कीमतों को समर्थन मिला है।

लेकिन अमेरिकी समाचार -पत्र 'वाल स्ट्रीट जनरल' में तेल की आपूर्ति में कमी के अनुमान से संबंधित रिपोर्ट के प्रकाशन से उपरोक्त दावे को समर्थन नहीं मिला है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पेरिस स्थित अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईए) तेल की आपूर्ति से संबंधित अपने अनुमान में भारी कमी कर सकती है। आईए का यह अनुमान हालांकि नवंबर 2008 में आने वाला है।

इस बीच तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक के महासचिव अब्दुल्ला सलेम अल बद्र ने गुरुवार को कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए आपूर्ति संकट नहीं बल्कि डालर में कमजोरी व सट्टेबाजी जिम्मेदार हैं।

बद्र के मुताबिक ओपेक राष्ट्र फिलहाल अपने निर्धारित कोटे से 2 लाख बैरल अधिक तेल की आपूर्ति कर रहे हैं। ओपेक राष्ट्र वैश्विक स्तर पर सिर्फ 40 फीसदी तेल की आपूर्ति करते हैं, इसलिए तेल की कीमतों में वृद्धि के लिए उन्हें उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

**

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+