'वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में भारत और चीन निभा सकते हैं निर्णायक भूमिका'

वाशिंगटन, 22 मई (आईएएनएस)। विश्व बैंक द्वारा समर्थन प्राप्त एक स्वतंत्र आयोग ने सुझाव दिया है कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में संतुलन कायम करने के लिए भारत और चीन जैसी नई उभरती अर्थव्यवस्थाओं को और अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

वाशिंगटन, 22 मई (आईएएनएस)। विश्व बैंक द्वारा समर्थन प्राप्त एक स्वतंत्र आयोग ने सुझाव दिया है कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में संतुलन कायम करने के लिए भारत और चीन जैसी नई उभरती अर्थव्यवस्थाओं को और अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

विश्व बैंक समूह द्वारा समर्थित 'विकास आयोग' नामक इस स्वतंत्र संस्था ने अपनी वृद्धि रिपोर्ट में कहा है कि विकासशील देशों की बढ़ती आर्थिक क्षमता के बाद दुनिया के आर्थिक तंत्र में स्थिरता बनाने में भी इनका बराबरी का योगदान बनता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "प्रभावशाली देशों की संख्या में इजाफा हुआ है। इस वजह से स्थिरता के निर्माण के लिए इनके बीच समन्वय की आवश्यकता बढ़ी है।"

एक अनुमान के मुताबिक 3.2 खरब की कुल संपत्ति के साथ चीन की अर्थव्यवस्था का आकार अमेरिकी अर्थव्यवस्था का लगभग 20 फीसदी है। इस समय भारत की अर्थव्यवस्था एक खरब के लगभग है।

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि विकासशील देशों को तेजी से तरक्की करने के लिए चाहिए कि नई तकनीकों का अधिकतम प्रयोग करें ताकि ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम किया जा सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को जलवायु परिवर्तन से निबटने के लिए बनाई गई योजनाओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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