पूर्व सांसदों ने सोनिया-राहुल की सलाहकार मंडली पर सवाल उठाए

नई दिल्ली, 22 मई (आईएएनएस)। कांग्रेस पार्टी के लगातार घटते जनाधार के कारणों की टोह लेने के लिए पार्टी के पूर्व सांसदों ने गुरुवार को जब संसद भवन स्थित संसदीय सौंध में बैठक की तो वही बातें सामने आई जिसे मुद्दा बनाकर पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश दास ने हाल ही में कांग्रेस पार्टी छोड़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का दामन थामन लिया।

नई दिल्ली, 22 मई (आईएएनएस)। कांग्रेस पार्टी के लगातार घटते जनाधार के कारणों की टोह लेने के लिए पार्टी के पूर्व सांसदों ने गुरुवार को जब संसद भवन स्थित संसदीय सौंध में बैठक की तो वही बातें सामने आई जिसे मुद्दा बनाकर पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश दास ने हाल ही में कांग्रेस पार्टी छोड़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का दामन थामन लिया।

पूर्व सांसदों की इस बैठक में सभी नेता इस बात पर सर्वसम्मत दिखे कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी महासचिव राहुल गांधी की सलाहकार मंडली के कारण ही कांग्रेस पार्टी का जनाधार लगातार बिखर रहा है। सांसदों ने गठबंधन की राजनीति के साथ ही नेताओं की आउटसोर्सिग को भी कांग्रेस के घटते जनाधार का कारण माना।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर बैठक के बारे में आईएएनएस को बताया, "कांग्रेस के घटते राजनीतिक ग्राफ का मूल कारण है कि सोनिया-राहुल के राजनीतिक प्रबंधक अपनी जिम्मेदारियों को ठीक ढंग से नहीं निभा रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं व नेताओं की समस्याओं को न तो ठीक ढंग से सुना जा रहा है और ना ही सही जगह तक उसे पहुंचाया जा रहा है। दोनों की सलाहकार मंडली के कारण कार्यकर्ताओं में लगातार रोष बढ़ रहा है।"

उन्होंने बताया कि बैठक में इस बात पर भी गंभीर चिंता हुई कि अखिलेश दास ने कांग्रेस छोड़ते ही सबसे पहला निशाना राहुल गांधी और उनकी सलाहकारी मंडली पर क्यों साधा। ज्ञात हो कि अखिलेश दास ने पार्टी का दामन छोड़ने के साथ ही राहुल गांधी को निशाने पर लिए था और कहा था कि वह एक चौकड़ी से घिरे हुए हैं उन्हीं के सलाह से फैसले लेते हैं।

इस बैठक में लगभग तीन दर्जन से भी अधिक पूर्व सांसदों ने हिस्सा लिया। इस बैठक के आयोजन के मुख्य सूत्रधार थे पूर्व सांसद असलम शेर खान। खान को हाल ही में भारतीय हॉकी संघ की जिम्मेदारी दी गई है। बैठक की अध्यक्षता मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व सांसद सुभाष यादव ने की।

इनके अलावा दिलीप सिंह भूरिया, रोमेश भंडारी, प्रताप भानू शर्मा, राजेन्द्र सिंह शमसी समेत कई राज्यों के तीन दर्जन से अधिक सांसदों ने आज की बैठक में हिस्सा लिया। इनमें अधिकांश सांसद ऐसे थे जिन्हें मौजूदा राजनीति में हाशिए पर डाल दिया गया है।

बैठक के बाद तय हुआ कि जिन बातों पर चिंता जताई गई उसका बिन्दुवार नोट बनाकर सोनिया व राहुल को सौंपा जाए। इन सभी नेताओं ने फैसला किया है कि सलाहकार मंडली के चक्कर में न पड़ कर सीधे सोनिया व राहुल से मिलकर उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत कराया जाएगा। साथ ही कार्यकर्ताओं की समस्याएं हाईकमान तक पहुंचे, इस बारे में भी कुछ सुझाव तैयार किए गए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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