बस्तर और दंतेवाड़ा देश के 10 सबसे पिछड़े जिलों में!

रायपुर, 21 मई (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के नक्सलवाद प्रभावित जनजातीय क्षेत्र बस्तर और दंतेवाड़ा जिले देश के 10 सबसे पिछड़े जिलों में से हैं। विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

मंगलवार को जारी सीएसई की 365 पृष्ठों की इस रिपोर्ट 'रिच लैंड्स, पूअर पीपल - इज़ सस्टेनेबल माइनिंग पॉसिबल' के अनुसार, "लौह अयस्क से समृद्ध बस्तर एवं दंतेवाड़ा देश के 10 सबसे पिछड़े जिलों में शुमार हैं। इसलिए जाहिर है कि खदान उद्योग के लाभ लोगों तक नहीं पहुंच रहे हैं।"

रिपोर्ट के अनुसार, " मानवीय विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ का कार्य बहुत कमजोर है। भारत के सबसे पिछड़े 150 जिलों में इस प्रदेश के करीब सभी जिलों का शुमार होता है।"

उधर छत्तीसगढ़ सरकार ने रिपोर्ट की मौलिकता पर सवाल खड़े किए हैं। राज्य सरकार द्वारा मंगलवार को जारी 12 पृष्ठों के एक बयान में कहा गया है, "यह रिपोर्ट समाचार पत्रों की भ्रामक रिपोर्टों, कुछ ऐसे लोगों के जन वक्तव्यों के आधार पर तैयार की गई है जो केवल अपनी ही बात को सही ठहराते हैं।"

सरकारी वक्तव्य में कहा गया है कि रिपोर्ट में अपार गलतियां हैं और इसमें लगाई गई अटकलों के जरिए सरकार को बदनाम करने का प्रयास किया गया है।

सीएसई की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में जंगलों को काट कर खनन कार्यो के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस कारण राज्य की करीब 40 प्रतिशत जनजातीय आबादी को दूसरे स्थानों पर जाना पड़ा है। यही वजह है कि राज्य में नक्सलवाद फैलता जा रहा है।

इसके विपरीत राज्य सरकार का दावा है कि राज्य की बहुसंख्यक जनजातीय आबादी बस्तर क्षेत्र में रहती है। जनजातीय क्षेत्रों में न तो औद्योगिक इकाइयां स्थापित की गई हैं न ही वहां खनन का काम चल रहा है। इसलिए औद्योगिकीकरण के कारण जनजातीय लोगों का अपने पुश्तैनी क्षेत्र छोड़ कर जाने की बात झूठ है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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