शराब नहीं चरणामृत के भी मुरीद हैं आईटी पेशेवर
नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। विदेश से लौटे सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) जगत के कई युवा पेशेवरों का मानना है कि विदेशों में रहते हुए यह महसूस होता है कि अपने वतन की मिट्टी में ऐसा बहुत कुछ है जिसके सहारे बड़े सुकून के साथ जीवन जिया जा सकता है और कई सार्थक प्रयास किए जा सकते हैं।
इस तरह की सोच रखने वाले कुछ युवकों ने देशभर में 'आई.टी.मिलन' नामक शाखाओं की स्थापना की है। यह शाखा पारंपरिक नहीं है, बल्कि जरूरत के हिसाब से इसके अपने कायदे हैं। फिलहाल इस शाखा से जुड़े युवा किसी सार्थक प्रयासों को अंजाम देने में लगे हैं।
हाल ही में अमेरिका से लौटे आई. टी. विशेषज्ञ विशाल शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "मैं जब अमेरिका में था तो हमेशा एक खालीपन महसूस होता था। परिवार के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी आत्मबोध होता था। निजी तौर पर समाज के लिए कुछ सार्थक करने की जिद ही मुझे यहां खींच लाई है।"
उन्होंने कहा, "अपने दैनिक कार्यो के अलावा मैं यहां 'आई. टी. मिलन' नाम से बनाई गई एक शाखा से भी जुड़ा हूं। यहां आई. टी. सेक्टर के लोग इकट्ठा होते हैं और समाज के लिए कुछ सार्थक करने की दिशा में सोचते हैं और विचार विमर्श करते हैं।"
बंगलौर में आई.टी. सेक्टर से जुड़े 28 वर्षीय राहुल आनंद ने कहा, "यह सही है कि इस सेक्टर के लोग विदेश जाना चाहते हैं और वहां जाकर पाश्चात्य संस्कृति की तरफ आकर्षित हो जाते हैं लेकिन कई ऐसे भी हैं जिन्हें वह संस्कृति रास नहीं आती है। ऐसे लोग आई. टी. मिलन में शामिल होकर ज्यादा सुकून पाते हैं। कम से कम मेरे साथ तो ऐसा ही है।"
बंगलौर के ही राजीव रंजन ने कहा, "यह नहीं समझा जाए कि सभी आई.टी. विशेषज्ञ शराब के ही मुरीद हैं! बंधु, यहां चरणामृत पीने वाले भी है और इसी में उनकी आस्था है।" उन्होंने कहा कि एक ऐसी शाखा की कमी थी, लेकिन आई. टी. मिलन ने इस कमी को पूरा किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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