विश्व स्वास्थ्य संगठन ने म्यांमार में 350 टन दवाएं भेजीं
नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। मच्छरों से फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की आशंका के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने म्यांमार में 350 टन दवाएं भेजी हैं।
डब्ल्यूएचओ के आपात कार्यदल (एक्शन इन क्राइसिस) के सहनिदेशक एरिक लारोक ने कहा, "नरगिस तूफान से आहत 25 लाख लोगों को दवाओं की सख्त जरूरत है ताकि फिर से कोई समस्या न उठे।"
बुधवार को जारी एक बयान में डब्ल्यूएचओ ने कहा कि संक्रामक रोगों, जैसे पेचिश, हैजा, मलेरिया और डेंगू से बचने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। मलेरिया जैसी बीमारियां महामारी का रूप ले सकती हैं, इसलिए अनेक गैरसरकारी संगठन भी भिन्न रूपों में मदद कर रहे हैं। संगठन के अनुसार हैजा और पेचिश के अनेक गंभीर मामले सामने आ चुके हैं।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार त्रासदी में 77 हजार 700 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 55 हजार से अधिक लापता हैं। इसके अलावा, 20 हजार से अधिक लोग घायल हैं।
बयान में कहा गया है कि बीमारियों का सामना करने के लिए दवाएं, पेयजल, शौचादि की व्यवस्था, अस्थाई निवास, टीके और स्वच्छ भोजन की जरूरत है। बड़ी संख्या में राहत सामग्री देश में पहुंची है, लेकिन अभी और अधिक सामग्री की जरूरत बनी हुई है।
संगठन की दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रीय कार्यालय की क्षेत्रीय निदेशक पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि डब्ल्यूएचओ ने 3 लाख 90 हजार लोगों को एक माह के लिए 13 स्वास्थ्य किट्स उपलब्ध कराई हैं।
इसके अतिरिक्त, 13 हजार मच्छरदानियां भी म्यांमार भेजी गई हैं। हालात को देखते हुए बीस हजार अन्य जल्द भेजी जाएंगी। साथ ही मच्छर मारने के लिए धुआं छोड़ने वाली मशीनों का अस्थायी आवासों में इस्तेमाल किया जा रहा है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार त्रासदी से बचने वाले अनेक लोगों को मनौवैज्ञानिक और भावनात्मक सहारा भी चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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